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अपने बच्चों से टीवी की लत कैसे छुड़ाएं
सामान्य शिष्टाचार
सोमवार , , 12 मई
teamtarakash.jpg तरकश ब्यूरो



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इस खतरनाक स्थिति से बच्चों का मानसिक विकास अवरुद्ध हो रहा है
दूनिया के अन्य विकसित देशों की तरह भारत मे भी अब टीवी का व्याप इतना बढ गया है कि इस पर क़ाबू पाना नामुमकिन हो गया है. भारत में इस समय 400 से अधिक टीवी चैनल मौजूद हैं और करीब 200 और शुरू होने जा रहे हैं. इसमें से कई बच्चों के विशेष चैनल भी हैं.

डिज़्नी, जेटिक्स, कार्टून नेटवर्क, निक और ऐसे ही अधिसंख्य बच्चों के चैनलों पर प्रसारित होने वाले हास्य, मनोरंजन और मारधाड भरे धारावाहिकों ने बच्चों को टीवी के सेट से बांध कर रख दिया है और वे अन्य रचनात्मक कार्यों को छोडकर अपना अधिकतर समय टीवी देखने में बिता रहे हैं. इस खतरनाक स्थिति से बच्चों का मानसिक विकास अवरुद्ध हो रहा है. बच्चों टीवी की इस लत को छुडाने के लिए अभिभावक निम्नलिखित कुछ युक्तियाँ आजमा सकते हैं:


निज पर शासन फिर अनुशासन

बच्चों से टीवी की लत छुडाने के लिए पहले आपको अपने व्यवहार मे भी बदलाव लाना होगा. यदि आप स्वयं अपना अधिकतर समय टीवी के सोप ऑपेरा, सास बहु के धारावाहिक या क्रिकेट मैच और समाचार देखने मे बिताते हैं तो आप बच्चों से कम टीवी देखने की अपेक्षा कैसे रख सकते हैं? आप अपने मनोरंजन के लिए टीवी देखना चाहते हैं, इसमें कोई बुराई नही है. लेकिन ध्यान रखें कि आप स्वयं उस समय से अधिक टीवी ना देखें जितना समय आप अपने बच्चों को देखने देना चाहते हैं. यानि कि यदि आप चाहते हैं कि आपके बच्चे रोज 2 घंटे टीवी देखें तो आप स्वयं भी उससे अधिक टीवी मत देखिए. ताकि बच्चों मे यह भावना ना आए कि उनके साथ अन्याय हो रहा है.


अपने सोफा को टीवी के सामने से हटाईए

यदि आपकी बैठक मे रखा मुख्य सोफा अथवा गद्दा टीवी के ठीक सामने है तो उसे कहीं और ले जाने की सोचिए. मुख्य सोफा अथवा बैठक पर दिन के समय घर के लोग बैठना पसंद करते हैं और सामने टीवी होने पर उसे चलाने की ईच्छा जागृत होनी स्वाभाविक है. इससे घर के सदस्यों के बीच स्वादहीनता की स्थिति पैदा होती है. लोग बात करने की बजाए टीवी देखना चाहने लगते हैं. और यही बात बच्चे भी सीखते हैं.


देखो मेरे बेडरूम में टीवी नही है!

क्या आपके शयनकक्ष में आपका निजी टीवी सेट लगा है? यदि हाँ तो आपको उसे हटा देना चाहिए. इससे आपके बच्चों के बीच एक सही संदेश जाएगा. यदि आप यह दर्शाएँगे कि आपके जीवन में टीवी का एक हद से अधिक महत्व नही है तो आपके बच्चे भी वही सीखेंगें. यदि आपके बेडरूम मे टीवी है तो उनके मन मे यह बात आएगी कि टीवी एक बहुत महत्वपूर्ण माध्यम है.


एक समय सारणी बनाएँ

अपने घर के हर सदस्य के साथ बैठकर एक समय सारणी बनाइए कि कौन क्या देखना चाहता है. यह बात हास्यास्पद लग सकती है लेकिन महत्वपूर्ण है. रविवार का दिन इसके लिए उपयुक्त हो सकता है. समाचार पत्रों मे प्रकाशित होने वाले टीवी के कार्यक्रमों को देखकर अपने लिए और अपने बच्चों के लिए एक समय सारणी बनाइए. ध्यान रखिए कि टीवी देखने के लिए तय किए गए समय के अंदर वे सभी कार्यक्रम आ जाएँ.

बच्चों को व्यस्त रखिए

बच्चों को अन्य रचनात्मक कार्यों मे व्यस्त रखिए. अपने बच्चों के उपर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव भी ना डालें. उनकी रुचियों को समझें. यदि उन्हे संगीत से प्रेम नही है तो उन्हे नाहक संगीत कक्षा में जाने के लिए बाध्य ना करें, उसी प्रकार यदि उन्हे चित्रकारी पसंद नही है तो उनके लिए ड्राइंगबुक लाना व्यर्थ है. लेकिन हर बच्चे में कोई ना कोई गुण तो होता ही है. आप देखिए कि आपके बच्चे का झुकाव किस कला की ओर अधिक है, और फिर उसे उस कला मे निपुण होने के लिए प्रेरित कीजिए.


बच्चों को कार्यक्रमों के प्रति शिक्षित करें

टीवी पर हिंसक धारावाहिकों का प्रचलन अधिक है. आश्चर्य की बात यह है कि बच्चों के चैनलों मे हिंसक कार्यक्रम सबसे ज्यादा दिखाए जाते हैं. पावर रेंजर्स, पॉकिमोन जैसे धारावाहिक ही नहीं टॉम एंड जेरी जैसे हास्य कार्टून धारावाहिक भी हिंसक होते हैं. जरूरत है कि आप अपने बच्चों को शिक्षित करें कि वास्तविक दूनिया मे ऐसा कुछ भी नही होता है और सुपरहीरो सिर्फ किताबों और टीवी व फिल्मों मे ही होते हैं. हममें से कोई भी कभी सुपरहीरो की तरह शक्तिशाली नही बन सकता है.





 

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