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समीक्षा
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शुक्रवार , , 23 मई |
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सबसे पहले तो यह समझना ही मुश्किल है कि घटोत्कच बच्चों की फिल्म है या बडों की? कभी यह बच्चों की मासूम सी फिल्म लगती है लेकिन अगले ही पल बॉलीवुड की मसाला फिल्म बन जाती है. वास्तव में यह दोनों ही है.
क्या है कहानी:
कहानी घटोत्कच के बचपन से शुरू होती है. घटोत्कच भीम और हिडिम्बा की संतान है और नटखट है. मध्यांतर से पहले फिल्म मे उसकी शैतानियाँ दिखाई जाती है. वह अपने पालतु हाथी के साथ ख़ूब मस्ती करता है.
मध्यांतर के बाद कहानी पुरी तरह से पलट जाती है. घटोत्कच द्वारिका जाता है जहाँ उसे पता चलता है कि अर्जुन का बेटा अभिमन्यु और बलराम की बेटी सुरेखा आपस मे प्रेम करते हैं. अभिभावकों को भी यह रिश्ता मंजूर होता है. लेकिन जुए में पांडवों की हार के बाद बलराम सुरेखा की शादी दुर्योधन के बेटे से करवाना चाहता है. और अब घटोत्कच दोनों प्रेमियों को मिलाने का काम करता है.
देखने की वजह:
फिल्म अच्छी कह सकते हैं. एनीमेशन फिल्म के हिसाब से फिल्म मे जान है और वे सभी मसाले हैं जो एकता कपूर के धारावाहिकों मे होते हैं. यानि सबके लिए सबकुछ.
ना देखने की वजह:
फिल्म थोडी अस्थिर सी है. कभी बच्चों की फिल्म लगती है, कभी नहीं लगती. इसमें एक चुम्बन का दृश्य भी जबरदस्ती डाला हुआ है. उस समय दर्शक चौंक से जाते हैं. फिल्म अचानक ही खत्म भी हो जाती है, मानो कि बस समय समाप्त हो गया हो और कहानी अधुरी रह गई हो.
तो क्या है आखिरी राय:
फिल्म देखी जा सकती है. पूरे परिवार के साथ सप्ताहांत में यह फिल्म देखना मनोरंजक हो सकता है. उस चुम्बन दृश्य को भूल जाइए क्योंकि आजकल के बच्चे ऐसे दृश्य हर दूसरी फिल्म में और अपने धारावाहिकों मे देखते हैं.
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