|
मलेरिया से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता शरीर के खिलाफ ही लडती है |
|
स्वास्थ्य
|
|
शनिवार , , 24 मई |
 |
तरकश ब्यूरो
|
|
|
|
| रक्त सेम्पलों का लेबोरेटरी मे अध्ययन करने से पता चला कि उनमें श्वेत
कणों का आकार प्रकार बदला हुआ था. और वहाँ मलेरिया के किटाणुँओं की
मौजूदगी थी. |
|
|
नई दवाईयों और बढ रही रोगप्रतिरोधक क्षमता की वजह से आज मलेरिया रोग जानलेवा नही रह गया है. लेकिन एक नई खोज ने दुनिया भर के चिकित्सकों को चौंका दिया है. अमरीकी और नाइजीरियन वैज्ञानिकों के एक दल ने पता लगाया है कि मलेरिया के कीटाणु, बच्चों के शरीर में मौजूद रोगप्रतिरोधक सिस्टम को बिगाड देता है और उसे स्वयं शरीर के डीएनए पर आक्रमण करने को उकसाता है.
इन वैज्ञानिकों ने नाइजीरिया के 21 बच्चों के रक्त के सैम्पल लिए जो फाल्सीपारम मलेरिया अर्थात जहरी मलेरिया से ग्रसित थे. इन रक्त सेम्पलों का लेबोरेटरी मे अध्ययन करने से पता चला कि उनमें श्वेत कणों का आकार प्रकार बदला हुआ था. और वहाँ मलेरिया के किटाणुँओं की मौजूदगी थी.
अधिक जाँच करने पर यह भी पता चला कि रक्त कणों में डीएनए की प्रतिकृतियाँ बन रही थी और रोगप्रतिरोधक कणों की संख्या मे भी वृद्धि हो रही थी. इसके बाद चिकित्सकों ने यह अनुमान लगाया कि शरीर के डीएनए रोगप्रतिरोधक कणों को खुद शरीर पर ही आक्रमण करने को बढावा दे रहे थे. बच्चों के लिए यह स्थिति घातक सिद्ध हो सकती है. अफ्रीका के देशों मे आज भी हजारों बच्चे मलेरिया के रोग से मारे जा रहे हैं. नई विकसित दवाईयाँ भी उन्हे बचा नही पा रही.
|
|