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मूक बधिर के लिए बन रहा है विशेष शब्दकोष, एक क्रांतिकारी पहल |
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तकनीक
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सोमवार , , 26 मई |
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तरकश ब्यूरो
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| अमरीका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी नैश स्क्रोल के नेतृत्व में
एक टीम मूक बधिरों की भाषा का एक विशेष शब्दकोष तैयार कर रही है. |
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यह शब्दकोष ना केवल मूक बधिर लोगों, बल्कि उनके अभिभावकों और अध्यापकों के लिए भी बहुत उपयोगी होने वाला है. अमरीका मे किए गए एक सर्वे के मुताबिक मूक बधिरों के अध्यापकों को भी इशारों की भाषा प्रदर्शित करते समय बनाए जाने वाले कई चिह्नों का मतलब पता नही होता है. और अभिभावकों के लिए भी कई बार स्थिति विकट हो जाती है.
उदाहरण के लिए एक मूक बधिर किशोर अपनी पाठशाला में कई प्रकार के इशारे और हाथों की भाव भंगिमाएँ सिख कर आता है. घर पर जब वह अपने माता पिता के साथ उन्हे इशारों के माध्यम से बात करना चाहता है, लेकिन उसके माँ बाप समझ ही नहीं पाते हैं कि वह क्या कह रहा है? उस समय उनके पास एक रास्ता बचता है कि उसके अध्यापकों से उस चिह्न का मतलब पूछा जाए. लेकिन मुश्किल की घडी तब आ जाती है जब कोई नया अध्यापक स्वयं भी कई सारे चिह्नों की पहचान नही कर पाता है.
लेकिन यह समस्या अब जल्द ही सुलझने वाली है. अमरीका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी नैश स्क्रोल के नेतृत्व में एक टीम मूक बधिरों की भाषा का एक विशेष शब्दकोष तैयार कर रही है. इस समय प्रोजेक्ट निर्माण के दौर में है और आने वाले तीन सालों मे पुरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा.
यह कैसे काम करेगा?
यह एक कम्प्यूटर प्रोग्राम होगा. प्रयोक्ता इस सोफ्टवेर को चालू करने के बाद सिस्टम में लगे वेबकेम के सामने हाथों से कोई चिह्न बनाता है. सोफ्टवेर उस चिह्न की पहचान कर उसका मतलब मॉनीटर स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है. एक अनुमान के मुताबिक अब तक 3000 चिह्नों की पहचान कर उनका मतलब रजिस्टर किया जा चुका है.
बोस्टन यूनिवर्सिटी के कम्प्यूटर विभाग के प्रमुख स्टेन स्क्लारोफ के मुताबिक यह परियोजना एक दिन कम्प्यूटर पर आधारित स्वयं संचालित खोज और अनुवाद का काम भी कर सकेगी.
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