|
महिलाएँ अपनी जिंदगी का एक दशक डायटिंग के पीछे व्यय करती है |
|
स्वास्थ्य
|
|
मंगलवार , , 27 मई |
 |
तरकश ब्यूरो
|
|
|
|
| एक चौंका देने वाली बात यह सामने आई कि हर 10 मे से 1 महिला अपने जीवन के 25 वर्ष डायटिंग करने में बिताती है. |
|
|
डायटिंग के प्रति महिलाओं के बढ रहे आकर्षण का एक प्रमाण हाल ही मे सामने आया है. एक अध्ययन के मुताबिक महिलाएँ अपनी जिंदगी का एक दशक यानि कि करीब 10 साल मात्र डायटिंग करने यानि कि वजन घटाने के पीछे व्यय करती है.
इस अध्ययन के अनुसार महिलाएँ प्रति वर्ष दो बार वजन घटाने के कार्यक्रम पर अमल करती है. प्रत्येक कार्यक्रम अनुपात में 5 सप्ताह तक चलता है. दूसरे शब्दों मे 18 से लेकर 70 वर्ष आयु के दौरान महिलाएँ करीब 108 डायटिंग कार्यक्रम आजमाती हैं, जो करीब 10 वर्ष का होता है.
प्रत्येक डायटिंग कार्यक्रम के दौरान महिलाएँ करीब 3 किलो वजन कम कर पाती हैं. लेकिन इसका बहुत कम असर उनकी सेहत पर पडता है. क्योंकि इस अध्ययन के अनुसार अधिकतर महिलाओं का वजन डायटिंग कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद फिर से बढ जाता है.
इस अध्ययन से एक चौंका देने वाली बात यह सामने आई कि हर 10 मे से 1 महिला अपने जीवन के 25 वर्ष डायटिंग करने में बिताती है.
लंदन के किंग्स कॉलेज के विशेषज्ञों द्वारा यह अध्ययन किया गया. उनके अनुसार महिलाओं का वजन कई कारणों से बढता है, इनमें प्रमुख है बदलती जीवनशैली, गर्भधारण, भावनात्मक असर और कार्यशैली. डायटिंग और क्रेश कॉर्स तथा ज़ीरो फ़िंगर प्राप्त करने के लिए महिलाओं द्वारा पौष्टिक आहार का त्याग करना उनके शरीर के लिए हितावह नही है.
|
|