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अपनी उम्र बढाना चाहते हैं? युवा लोगों से मेलजोल बढाइए
रोचक तथ्य और जानकारी
बुधवार , , 28 मई
teamtarakash.jpg तरकश ब्यूरो



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युवाओं के साथ रहने से कार्य करने के प्रति सकारात्मक सोच जागृत होती है, उर्जा का संचार होता है, लडने की शक्ति बढती है और उत्साह में वृद्धि होती है.
एक अध्ययन से पता चला है कि सामाजिक मेलजोल, विशेषकर युवा लोगों से मेलजोल बढाने से व्यक्ति की उम्र बढ सकती है! अमरीका की आइओवा विश्वविद्यालय के चंग फेंग वु द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है.

चंग वेंग फु की रपट के अनुसार यदि बुजुर्ग अथवा उम्रदराज व्यक्ति युवा लोगों के सम्पर्क मे रहता है तथा उनसे नियमित मेलजोल बनाकर रखता है तो उसकी उम्र में बढोत्तरी हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि युवा व्यक्तियों के साथ रहने से उनकी उर्जा का सकारात्मक प्रभाव बुजुर्ग व्यक्तियों पर पडता है. इसके अलावा वे अधिक तेजी से कार्य करने के प्रति उत्साहित होते हैं. इससे उनके शरीर की क्रियाएं सुचारू रूप से चलती रहती है.

युवाओं के साथ रहने से कार्य करने के प्रति सकारात्मक सोच जागृत होती है, उर्जा का संचार होता है, लडने की शक्ति बढती है और उत्साह में वृद्धि होती है.

यह पहले भी साबित हो चुका है कि मानव के लिए सामाजिक मेलजोल बनाए रखना अति आवश्यक होता है. नए अध्ययन ने इसी बात को आगे बढाया है.




 

टिप्पणियाँ (2)add
yuva
द्वारा प्रेषित laxminarainsharma , अगस्त 27, 2008
phale bhee aisa sodh ho chuka hai. kheton men yadi vradha vyakti pani dega to phasal shighra nahin badhegi, yadi mahila pani degi to phasal sheghra badhegi aur yadi bachche pani denge to phasal atishighr badhegi. isee parakar bachchon ke sath rahane se unki sanson ki vajaha se vyakti vradhavastha men bhee yova bana rahaskata hai . esake liye primaty school ka teacher aur hospital ka doctor achchhe udaharan hai.primary school ka teacher aur doctor ka age group mila kar dhekhen.primary teacher yuva lagega aur doctor usee age ka vradha lagega. yahee hai swason ka khel.thanks.
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द्वारा प्रेषित jagdishjain , नवम्बर 17, 2008
जीने की optimum value है. ठीक ऐसे जैसे किसी भी कार या मशीन की अधिकतम उपयोगावधि होती है. अपने घर में, क्या कोई अनुपयोगी वस्तु रखना चाहेगा? और इसका उत्तर होगा, नहीं. मनुष्य देह भी एक आयु/अवस्था के बाद अनुपयोगी हो जाती है. आपके सभी सांसारिक दायित्व पूरे हो गए है, आयु 60-65 वर्ष है. कोई उपयोगी कार्य आप कर नहीं रहे हैं. तब और अधिक जीने की चाह क्यों? आप धरती पर बोझ बने रहना क्यों चाहते हैं? सोचे...? अधिक आयु की इच्छा से पहिले कभी वृद्ध जीवन को गौर से देखिये, दांत टूट गए, आँखों से कम दिखाई देने लगता है, सुनाई भी कम देने लगता है, सभी अंग-प्रत्यंग स्थिल हो जाते हैं. तब भी और अधिक जीने की चाह, आखिर क्यों? क्या मकसद है आपकी इस चाह का?
यदि आप सक्षम है तो अपना एक ठिकाना अपने बच्चों के सामूहिक ठिकाने से अतिरिक्त बनाकर अवश्य रखे. आप अपने हम उमर के बीच रहेगें तो ज्यादा खुश रहेगें. हम वृद्ध जनों के लिए सन्यास की बात नहीं कर रहे हैं. जीवन-मरण सब विधि के हाथ है, तब भी और-और जीने की चाह किस लिए?

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