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गर्भावस्था के दौरान होने वाली तकलीफे |
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स्वास्थ्य
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बुधवार , , 11 जून |
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तरकश ब्यूरो
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गर्भावस्था के दौरान महिलाएं विभिन्न शारीरिक तथा मानसिक समस्याओं से गुजरती है. इन्हे दूर करने के लिए चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए. गर्भावस्था को समान्यरूप से तीन चरणों में बाँटा जा सकता है. पहला चरण 1 से 12 सप्ताह का, दूसरा चरण 13 से 28 सप्ताह का तथा तीसरा चरण 29 से 40 सप्ताह का.
प्रथम चरण में होने वाली तकलीफे
- उबकाइयाँ आना, घबराहट होना, खाने में अरूची तथा उल्टियाँ होना.
- अतिशय उल्टियाँ होने के कारण निम्न हो सकते है : जुड़वाँ बालक होना, खून का ऊँचा दबाव, असामान्य गर्भ, पीलिया, एसिडिटी, मधुप्रमेह तथा मूत्र पिण्ड की कोई तकलीफ.
- योनिमार्ग से रक्तस्त्राव होना, यह लाल रंग का भी हो सकता है, तो गहरा कत्थई भी. इस स्थिति में गर्भ सुरक्षित हो सकता है, तो गर्भपात भी हो सकता है.
गर्भावस्था के दूसरे चरण में होने वाली तकलीफे
- डकारें आना, घबराहट होना, वायु तथा एसिडिटी बनना.
- गर्भावस्था के दौरान होने वाले अंतःस्त्राव के कारण कुछ जोड़ व स्नायु ढिले होते है, इसके कारण कमर दर्द, पैर खीचना, चलने में तथा करवट बदलने में तकलीफ होना.
- सरदर्द तथा कब्ज होना तथा मस्से से खून गिरना
- नींद न आना, विचारों का उमड़ना, चिड़चिड़ापन, मूड बदलना, याददाश्त कमजोर होना.
- स्तनों से चिकना द्रव्य निकलना तथा स्तन भारी होना तथा उसके कारण दर्द होना.
- मुँह, योनि तथा बगल में संक्रमण लगना
गर्भावस्था के तीसरे चरण में होने वाली तकलीफे
- नींद न आना. इसके कारणों में गर्भाशय का बढ़ना, डकारें, उबकाईयाँ, प्रसूति सम्बन्धी चिंताएं शामिल है.
- चमड़ी सम्बन्धी तकलीफे होना, गर्भाशय के बढ़ने से चमड़ी व स्नायु खींचते है जिससे पेट व स्तनो पर धारियाँ बन जाती है.
- खून का दबाव बढ़ना, पैरों में सूजन आना, पेशाब में प्रोटीन जाना वगेरे समस्याजनक हो सकते है.
- योनिमर्ग से द्रव्य गिरना. यह दुर्गंधयुक्त हो तो संक्रमण को दर्शाता है, अगर प्रवाही पतला पेशाब जैसा हो तो वह गर्भजल भी हो सकता है. चिकित्सक की सलाह लें.
- बालक असामान्य अवस्था में रहना. 36 - 37 सप्ताह तक बालक उल्टा नहीं होता है तथा टेढी मेढी अवस्था में रहता है तो शल्य-चिकित्सा द्वारा प्रसूति करवानी पड़ती है.
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