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माइनोरिटी रिपोर्ट हकीकत में! हाथों के इशारे समझने वाला यंत्र विकसित हुआ |
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विज्ञान
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गुरुवार , , 19 जून |
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तरकश ब्यूरो
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| फिल्म में टोम अपने दास्तानों पर लगे सेंसरों की मदद से एक वर्चुअल स्क्रीन तैयार करते हैं
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क्या आपको टोप क्रुज अभिनीत फिल्म माइनोरिटी रिपोर्ट याद है. इस भविष्यवादी फिल्म में टोम अपने दास्तानों पर लगे सेंसरों की मदद से एक वर्चुअल स्क्रीन तैयार करते हैं और फिर उस स्क्रीन पर कुछ उसी तरह से काम करते हैं जैसे हम और आप अपने डेस्कटोप पीसी पर करते हैं. फर्क इतना ही कि हम माउस और की बोर्ड का उपयोग करते हैं और टोम क्रुज मात्र अपनी उँगलियॉ को और वे स्क्रीन को छूते भी नही हैं.
लेकिन सभी विज्ञान फिल्में मात्र काल्पनिक ही नही होती हैं, उन फिल्मों की दिखाई गई तकनीक वास्तव में भी तैयार की जा सकती है. इस प्रकार से देखा जाए तो ये फिल्में नई नई सम्भावनाएँ ही खोलती हैं.
इज़रायल की बेन गुरियन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अब एक हेंड गेस्चर रिकग्नाइजिन्ग डिवाइस (हाथों का हलन चलन समझने वाला यंत्र) तैयार किया है जिसका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में होना है.
अस्पतालों में विभिन्न उपकरणों को छूने से इंफेक्शन के फैलने का खतरा बना रहता है. इस खतरे को कम करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है.
उदाहरण के तौर पर कई अस्पतालों में टच स्क्रीन किओस्क का प्रयोग होता है. डॉक्टर टच स्क्रीन मॉनीटर पर अपनी अंगुलियों से छूकर कमांड देते हैं जिससे इंफेक्शन फैलता है.
लेकिन इस नई तकनीक से डॉक्टरों को स्क्रीन को छूना ही नही पडेगा बल्कि वे दूर से ही मात्र इशारे कर कमांड प्रेषित कर पाएंगे. इस तकनीक में स्क्रीन के उपर एक कैमरा लगा होता है जो हाथों के इशारे को रिकार्ड कर कम्प्यूटर तक भेजता है.
अब यदि डाक्टर अपने हाथ को दायीँ तरफ ले जाते हैं तो तस्वीर दायीं तरफ जाती है, बायीं तरफ ले जाते हैं तो तस्वीर बायीं तरफ जाती है. ज़ूम करने के लिए वे अपनी हाथ को घडी की दिशा में गोल गोल घूमाते हैं, ज़ूम आउट करने के लिए विरूद्ध दिशा में हाथ घूमाते हैं.
आइडल मोड पर लाने के लिए वे अपने हाथों को तेजी से नीचे गिराते हैं. इससे सिस्टम सुशुप्तावस्था में चला जाता है, जिससे कोई अनवांछित कमांड सिस्टम तक ना चला जाए.
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