| मुद्रास्फीति 11% पर. इसकी वजह और असर |
| विशेष | |||||
| शनिवार , , 21 जून | |||||
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टिप्पणियाँ
(3)
विशेषज्ञों का काम है विश्लेषण करना, वह करते रहें और अपनी प्यास वुझाते रहें. हमारी तो जेब कट रही है, हर रोज कीमतें ऊपर चली जाती हैं. कल जो सब्जी १६ रुपए किलो थी, आज २० रुपए किलो है. पेंशन याफ्ता लोगों के दिल में इस सरकार के लिए केवल बद्दुआ है.
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जेब का जन्म ही कटने के लिए हुआ है। दर्जी जब से काटना शुरू करता है। उसके बाद जेब कटना कभी नहीं रूकती। इस जेबकटी में सरकारों की भूमिका बड़ी जायकेदार होती है। सबसे बड़ी जेबकट तो सरकार ही है जो अपने असर का प्रयोग या दुष्प्रयोग कर काटती रहती है। बाकी तो माल निकाल कर छोड़ देते हैं जेब को सही सलामत पर सरकार उसमें कट लगा देती है और माल निरंतर बहता रहता है, जेब से बाहर निकलता रहता है. इस जेबकतरे या जेबकटर को कौन पकड़ सका है.
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