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जब कोलम्बिया की सेना ने बंधकों को छुडाया, वह भी एक भी गोली चलाए बिना |
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विश्व दर्पण
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शुक्रवार , , 04 जुलाई |
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तरकश ब्यूरो
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कोलम्बिया की राष्ट्रीय सेना ने हाल ही में एक करिश्मा कर दिखाया. उन्होने पिछले चार साल से बंधक बनाए गए कुछ लोगों को रिवोल्यूशनरी आर्मड फोर्सेस ऑफ कोलम्बिया के चंगुल से छुडाया. और इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए उन्हें एक भी गोली नहीं चलानी पडी.
23 फरवरी 2002 को विद्रोही गुरिल्लों ने 3 अमरीकी नागरिकों और 11 कोलम्बियाई सैनिकों को अगुवा कर लिया था. ये लोग घने जंगलों मे बने विद्रोहियों के केम्पो में कैद करके रखे गए थे.
कोलम्बियाई विद्रोही इन बंधको को अपने केम्प से दूसरे केम्प तक ले जाने के लिए हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल करते थे.
एक दिन सुबह 4 चार बजे इन बंधकों को बताया गया कि उन्हें ले जाने हेलिकॉप्टर आया हुआ है. बंधकों के लिए यह एक आम बात थी और कुछ भी नया नहीं था.
हेलिकॉप्टर सफेद रंग का था और चालक दल ने चे ग्वेरा का चित्र लगी शर्ट पहन रखी थी. गुरिल्ला विद्रोहियों ने बंधकों को हेलिकॉप्टर में बैठा दिया. और हेलिकॉप्टर उन्हे लेकर उड गया. विद्रोहियों को लगा था कि ये लोग उनके अपने साथी हैं, लेकिन वास्तव में वे कोलम्बिया नेशनल आर्मी के कमांडो थे, जो विद्रोहियों को लेकर चले गए थे.
इस तरह से सेना की इस विशेष टुकडी का 6 महीने पुराना ऑपरेशन खत्म हुआ. इन 6 महीनों के दौरान इस टुकडी ने गुरिल्ला केम्पो तक अपनी पहुँच बनाई, उनके केम्प तलाशे और यह नोट किया कि वे लोग बंधकों को कहाँ ले और कैसे ले जाते हैं.
और उसके बाद उन्होने यह प्लान बनाया गया जो सफल भी रहा. इस तरह से कोलम्बिया के 11 और 3 अमरीकी नागरिकों ने चार साल बाद आजादी की सांस ली.
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