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फिल्म समीक्षा : जाने तु या जाने ना |
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समीक्षा
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शुक्रवार , , 04 जुलाई |
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बॉलीवुड सिनेमा यानि कि फील गुड सिनेमा. ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि बॉलीवुड मे बनने वाली हर दूसरी फिल्म फील गुड फिल्म ही होती है और जाने तू या जाने ना उससे अलग नही है.
जाने तू... प्रभावित करने वाली फिल्म तो नही है, लेकिन एक हल्की फुल्की फिल्म है जिसे पूरे परिवार के साथ देखा जा सकता है.
यह 6 दोस्तों की कहानी है लेकिन जाहिर है मुख्य पात्र दो ही हैं, जय (इमरान खान) और अदिति (जेनेलिया डिसुजा). इन दोनों के अलावा चार अन्य दोस्तों का एक समूह है. ये साथ खेलते हैं, कूदते हैं, मस्ती करते हैं और जी हाँ इनमें प्यार भी होता है.
सब जानते हैं कि जय अदिति से प्रेम करते हैं, लेकिन वे दोनों ही इस बात को नहीं समझ पाते. लेकिन अंत मे जैसा कि होता आया है, सब कुछ ठीक हो जाता है.
इमरान खान अच्छे अभिनेता हैं. वैसे अभिनय उन्हे विरासत मे ही मिला है. जेनेलिया अच्छी लगती हैं. रत्ना पाठक शाह इमरान खान की माँ की भूमिका में प्रभावित करती है. वे अपने पति की फोटो से बात करती हैं (हम पाँच याद आ सकता है).
अन्य कलाकारों ने भी अच्छा अभिनय किया है. ए.आर. रहमान का संगीत अच्छा है, और इसके कुछ गाने हीट हो चुके हैं. अब्बास टायरवाला का निर्देशन भी ठीक है.
फिल्म मध्यांतर के बाद खींची हुई लगती है. फिल्म की कहानी में भी कोई नयापन नही है. पटकथा कमजोर ही है.
फिल्म एक बार देखी जा सकती है. हालाँकि यह फिल्म युवाओं को पसंद आएगी. लेकिन यह कैसा व्यापार कर पाएगी यह कहना मुश्किल है.
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