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ऑलम्पिक विजेताओं की कुछ अनजानी विडम्बनाएँ |
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खेल जगत
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सोमवार , , 21 जुलाई |
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| जेसे ओवेंस ने 1936 के बर्लिन ऑलम्पिक में चार स्वर्ण पदक जीते थे. लेकिन घर लौटने पर उनका कोई स्वागत नहीं हुआ
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ऑलम्पिक खेलों मे स्वर्ण पदक जीतना हर खिलाडी का सपना होता है. लेकिन ऑलम्पिक विजेता की जिंदगी जीत के बाद हमेशा खुशहाल नहीं भी रहती है. पेश है कुछ उदाहरण:
- जेसे ओवेंस ने 1936 के बर्लिन ऑलम्पिक में चार स्वर्ण पदक जीते थे. लेकिन घर लौटने पर उनका कोई स्वागत नहीं हुआ. उन्हे राष्ट्रपति ने न्योता नहीं दिया. वे एक पेट्रोल पम्प में काम करते थे और घोडों के साथ दौड लगाते थे. उनका कसूर? वे अश्वेत थे.
- स्वर्ण पदक विजेता पहलवान शाह रेजा पहालवी की संदिग्ध रूप से मौत हो गई थी. शक इरान की सिक्रेट पुलिस पर गया था.
- लुज लॉंग ने 1936 के ऑलम्पिक खेलों मे स्वर्ण पदक जीता था, कुछ महीनों बाद मित्र सेनाओं के हमले में उनकी मौत हुई.
- कजाकिस्तान के बॉक्सर Bekzater Sattarkhanov ने सिडनी ओलम्पिक मे स्वर्ण पदक जीता था. अगले महीने कार दुर्घटना मे उनकी मृत्यु हो गई.
- जैक लेवलोक ने 1936 ऑलम्पिक खेलों मे पदक जीता. अगले महीने इंग्लेंड में एक ट्रेन से गिरकर उनकी मौत हो गई.
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