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हिन्दी के लिए उतार चढाव भरा रहा यह सप्ताह |
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समाज
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शनिवार , , 26 जुलाई |
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तरकश ब्यूरो
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विश्व स्तर पर देखें तो हिन्दी के लिए यह सप्ताह उतार चढाव भरा रहा.
खुशी का पल:
अमरीका के उच्च माध्यमिक विद्यालयों मे हिन्दी की पाठ्य पुस्तक का समावेश किया गया है. भारतीय मूल के शिक्षक अरूण प्रकाश ने आठ वर्ष की मेहनत के बाद एक हिन्दी की पाठ्य पुस्तक तैयार की है जिसे "नमस्ते जी" नाम दिया गया है. अब यह पाठ्य पुस्तक अमरीका की उच्च माध्यमिक विद्यालयों मे एक विषय के रूप में पढाई जाएगी.
अरूण प्रकाश अपने संघर्षों को याद करते हुए बताते हैं कि उन्होने पहली बार 1989 में हिन्दी पढाना शुरू किया था तब उनकी कक्षा में केवल 8 विद्यार्थी ही होते थे उनमें से भी 7 भारतीय मूल के होते थे. उन्हें दिन के मात्र $15 मिलते थे जिनसे वे अपनी कार का गैस ही भरवा पाते थे. लेकिन अब माहौल बदल गया है.
विश्व में भारत को एक उभरती हुई शक्ति के रूप में देखा जा रहा है और इस तरह से भारत के विषय मे जागरूकता आ रही है साथ ही भारतीय भाषाओं को सीखने की होड बढ रही है. हिन्दी का वर्चस्व भी इस प्रकार बढ रहा है.
दुख की बात:
नेपाल के उपराष्ट्रपति परमानन्द झा ने अपने पद की शपथ हिन्दी में ली और इससे नेपाल में विरोध का दौर शुरू हो गया है. कई राजनैतिक दल और विद्यार्थी संगठन उनका विरोध कर रहे हैं. इनका कहना है कि उपराष्ट्रपति को या तो नेपाली अथवा उनकी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेनी चाहिए थी. उन्होने शपथ एक ऐसी भाषा में ली जो कि आयातित है और पडोसी देश की राजभाषा है ना कि नेपाल की.
आन्दोलनकारियों ने तराई क्षैत्र में कई जगहों पर धरना प्रदर्शन किया और रास्तों को जाम किया. पूरे नेपाल मे हिन्दी विरोधी माहौल गरमा रहा है.
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