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फिल्म समीक्षा : सिंग इज किंग |
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समीक्षा
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शुक्रवार , , 08 अगस्त |
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सिंह इज किंग एक मसाला पापड जैसी फिल्म है. यह मनोरंजन से भरपूर है, लेकिन जब मैं मनोरंजन से भरपूर कह रही हुँ तो इसका मतलब है विशुद्ध बॉलीवुड मनोरंजन. यहाँ दिमाग का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं. या तो आप फिल्म ना ही देखें या फिर दिमाग घर पर छोडकर दो घंटे के लिए मजा लें.
कहानी
हैप्पी सिंह [अक्षय कुमार] की हरकतों से सारे गाँव वाले इतने परेशान हो उठते हैं कि उन्हे गाँव से बाहर विदेश भेज दिया जाता है. उनके साथ उनके मित्र [ऑम पुरी] भी हैं जो हमेशा सताए हुए रहते हैं.
दूसरी और एक लक्की सिंह [सोनु सूद] है जो ऑस्ट्रेलिया का सबसे बडा डोन है. जिसकी अपनी पुरी एक मंडली है जिसमें जावेद जाफरी, नेहा धूपिया, यशपाल शर्मा आदि शामिल हैं.
हैप्पी सिंह को एक लडकी सोनिया मिलती है और दोनों मे प्यार हो जाता है (जाहिर है). लेकिन सब ठीक ही रहेगा तो फिल्म कैसे बनेगी सो, हैप्पी सिंह लक्की सिंह से टकराता है और उसकी जान बचाने के चक्कर मे खुद फँस जाता है.
क्यों देखें:
अक्षय कुमार लाजवाब हैं, वे जितनी मौलिकता से हास्य अभिनय करते हैं शायद ही कोई और करता होगा. उन्होने एक्शन दृश्य भी शानदार दिए हैं. ऑम पुरी और किरण खेर ने बढिया अभिनय किया है. ये दोनों ही मँजे हुए अभिनेता हैं. कटरीना फिल्म मे अच्छी लगती हैं.
फिल्म के गाने भी काफी पसंद किए जा रहे हैं.
क्यों ना देखें:
फिल्म वैसे तो कहीं ठहरती हुई नही लगती लेकिन कुछ "हटके" नहीं होता है तो ऐसा लगता है कि शायद खींच रही है. वैसे सिंह इज किंग जैसी मसाला फिल्मों को ना देखने के पीछे केवल एक ही वजह हो सकती है, आपको ऐसी फिल्मे पसंद ही ना हो तो. बाकी तो कोई वजह नहीं.
अंत में:
देखिए, मजे लीजिए और भूल जाइए. वैसे पैसे वसूल तो जरूर होंगे. |
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