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मान गए मुगल-ए-आज़म: फिल्म समीक्षा |
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समीक्षा
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शुक्रवार , , 22 अगस्त |
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क्या आपने हॉलीवुड की फिल्म To be or Not to Be देखी है? यदि हाँ तो आपको यह फिल्म देखने की आवश्यकता नहीं रहती है, और यदि नहीं तो क्यों ना वही फिल्म देखें! मान गए मुगले आज़म, To be or Not to Be (1983) की रीमेक है.
कहानी
मजूमदार (परेश रावल) थिएटर का मालिक है. उसकी एक युवा पत्नी शबनम (मल्लिका शेरावत) है जो दिलफेंक किस्म की लगती हैं. मजुमदार के थिएटर में कुछ कलाकार हैं और उनमे से एक की शक्ल डॉन से मिलती है.
अर्जुन रस्तोगी (राहुल बॉस) एक खुफिया विभाग का अधिकारी है जो इलाके से डॉन का सफाया करना चाहता है. एक स्थानीय गुंडा (पवन मल्होत्रा) इलाके में आतंक फैलाना चाहता है और गज़ल गायक हल्दी हसन (के. के. मेनन) के जिम्मे बम रखने का काम है. अंत में आम कॉमेडी फिल्मों की तरह कई सारी गलतफहमियाँ होती है और फिर बोर करने वाला अंत होता है.
क्यों देखें:
यदि आप यह फिल्म देखना ही चाहते हैं तो परेश रावल के लिए देख सकते हैं. परेश रावल सिद्ध करते हैं कि खराब से खराब पठकथा वाली फिल्म मे भी वे जान डाल सकते हैं.
क्यों ना देखें:
अनगिनत वजहें हैं. फिल्म की पटकथा बेकार है. संगीत स्तरहीन है. मल्लिका ओवरएक्टिंग अधिक करती हैं और राहुल बॉस थके से लगते हैं. कुछ भी ऐसा नहीं जो फिल्म देखने की वजह बन सके.
अंत में:
200 रूपए खर्च कर किसी मल्टिप्लेक्स में यह फिल्म देखना दुःस्वप्न जैसा हो सकता है.
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