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समीक्षा
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शुक्रवार , , 22 अगस्त |
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रामगोपाल वर्मा की नई फिल्म फूँक उन गिनी चुनी फिल्मों मे से एक हैं, जिनके रीलिज होने से पहले काफी उत्तेजना खडी की गई. लेकिन फूँक देखने के बाद लगता है कि वह उत्तेजना गलत नहीं थी.
फूँक रामू की पिछली फिल्म भूत जितनी खौफनाक तो नहीं लगती लेकिन यह फिल्म डराती जरूर है. आपको जादू टोने मे भरोसा हो या ना हो, यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर जरूर कर देती है. यह फिल्म रामू की बेहतरीन फिल्मों मे से एक मानी जा सकती है.
कहानी
राजीव (सुदिप) एक निर्माण इंजीनियर है जो अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता है. उसे काले जादू, टोने टोटके आदि से बहुत नफरत है. उसे बुरी आत्माओं पर भरोसा नहीं है. लेकिन एक दिन उसका भरोसा तब टूट जाता है जब उसके घर में एक प्रेतात्मा दाखिल हो जाती है.
क्यों देखें:
यदि इस फिल्म को मनोरंजन के माध्यम की तरह देखा जाए तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी. फिल्म का छायांकन लाजवाब है और पठकथा भी अच्छी है. लाइटिंग और पार्श्वसंगीत बेहतरीन है. और उतना ही अच्छा है अभिनेताओं का अभिनय.
छोटी बच्ची अहसास चन्ना तथा अन्य कलाकारों सुदिप, अमृता खानविलकर, अश्विनी काल्सेकर, लिलिट दूबे, गणेश यादव, जाकिर हुसैन आदि सभी ने उम्दा अभिनय किया है.
रामू काफी फिल्मों के बाद खिले हैं. और फिर इस तरह की फिल्मे उन्हे रास भी आती है.
क्यों ना देखें:
यह फिल्म एक डार्क फिल्म कही जा सकती है, जो टोने टोटकों पर आधारित है. इसलिए इसे अपने विवेक से ही देखें.
अंत में:
जैसा कि मैने पहले कहा मनोरंजन की दृष्टि से देखें तो यह फिल्म कतई निराश नहीं करती. एक बार जरूर देखी जा सकती है.
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