आतंकवादियों द्वारा भेजी जा रही ईमेलों के स्रोत का पता लगाने मे नाकाम एजेंसियाँ अब ईमेल स्निफिंग का विकल्प इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है.
ईमेल स्निफिंग के द्वारा वे देशों के भीतर एक दूसरे को भेजी जा रही ईमेलों के रास्तों पर नजर रख पाएगी. देश में इस समय 6 बडे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर हैं, खबर के मुताबिक ईमेल स्निफिंग की शुरूआत इन्ही आई.एस.पी. के द्वारा शुरू की जाएगी.
ईमेल स्निफिंग, एक तरह से विभिन्न मेल सर्वरों द्वारा भेजे जा रहे “पैकेटों’ पर नजर रखना होता है. इस प्रक्रिया को डीप पैकेट इनवेस्टिगेशन भी कहते हैं. इससे आई.एस.पी. अपने तंत्र के माध्यम से प्रयोक्ताओं द्वारा एक दूसरे को भेजे जा रहे आँकडों पर नजर रख सकते हैं.
हालाँकि कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह के आधुनिक सोफ्टवेरों के अमल मे लाने से प्रयोक्ताओं के निजी मेल गोपनीय नहीं रहेंगे. और अधिकारी किसी भी मेल को जब चाहे पढ पाएगी. इसके अलावा आई.एस.पी. अपने ट्रैफिक पर नजर रखकर अपने कार्पोरेट और प्रीमियम ग्राहकों को अधिक स्पीड प्रदान करने लगेगी.
उदाहरण के लिए यदि कोई आई.एस.पी. देखेगा कि उसके तंत्र पर ऑडियो और वीडियो फाइलें अधिक भेजी जा रही है तो उनकी गति धीमी कर सकेगा, जिससे उसके प्रीमियम ग्राहकों को अधिक स्पीड मिल सके.
लेकिन ऐसा तो अभी भी होता है. आई.एस.पी. अपने तंत्र पर नजर रखते ही हैं और जरूरत के हिसाब से इसमे बदलाव भी करते रहते हैं. इसलिए यह कहना मुश्किल होगा कि “ईमेल स्निफिंग” आदि तकनीकों से गुप्तचर एजेंसियाँ कितना फायदा उठा पाएँगी.
-- शास्त्री
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