बेंजामीन फ्रेंकलीन कहा करते थे कि इंसान को सोना नहीं चाहिए बल्कि काम करते रहना चाहिए क्योंकि मरने के बाद तो कब्र में सोना ही है.
उस समय यह विधान काफी प्रचलित हुआ था, लेकिन आज यह व्याख्या बदल गई है. कई वैज्ञानिक शोधों से साबित हुआ है कि इंसान नींद में भी काफी क्रियाशील रहता है और नींद लेने से कार्यक्षमता और रचनात्मकता बढती ही है.
नींद लेने को समय का नुकसान नहीं माना जाना चाहिए. नींद लेते समय हम यह मानते हैं कि हम कुछ नहीं कर रहे हैं लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है.
साइकोलोजिस्ट जंग बीमन के अनुसार, जब हम सोते हैं तो हमारे दिमाग के न्यूरोन वास्तव में अलग अलग घटनाओं को आपस में जोडकर हमारी याददास्त को ताजा करते हैं और अगले दिन के कार्य आसान करते हैं.
मान लीजिए आप किसी प्रोजेक्ट पर काम करते कहीं अटक गए हैं और कोई आइडिया बुन रहे हैं, उसके बाद आप सो जाते हैं तो नींद उस आइडिया अथवा युक्ति को बुनने में दिमाग की मदद करती है और उठने के बाद आप उस कार्य को और अच्छी तरह से कर पाते हैं. लेकिन आपको यह अहसास नहीं होता कि नींद के दौरान भी आप उसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे.
दूसरे शब्दों मे जब इंसान सोता है तो अधिक रचनात्मक होता है, बस उसे इस बात का अहसास नहीं होता.