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समीक्षा
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शुक्रवार , , 03 अक्टूबर |
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यदि आप संजय गढवी हैं जिन्होने दो सुपर हीट फिल्में धूम और धूम 2 बनाई है तो जाहिर सी बात है कि आपसे अपेक्षाएँ भी काफी होंगी. लेकिन किडनेप अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती है. यह नई बोतल मे पुरानी शराब जैसी बात है.
कहानी
फिल्म की कहानी है कबीर[इमरान खान] की जो विक्रांत [संजय दत्त] से बदला लेना चाहता है. विक्रांत अपनी पत्नी से अलग रहता है और उसकी एक बेटी सोनिया [मिनीषा लाम्बा] है.
कबीर सोनिया का अपहरण कर लेता है, और विक्रांत से कहता है कि वह उसके साथ एक खेल खेलना चाहता है, जिसे उन दोनों को ही खेलना है.
वह पैसे नहीं चाहता बस बचपन में अपने साथ हुए अन्याय का बदला लेना चाहता है.
क्यों देखें:
फिल्म मे अगर कुछ देखने लायक है तो वह इमरान खान का अभिनय है. इमरान ने अपनी दूसरी ही फिल्म में नेगेटिव रोल कर हिम्मत का परिचय दिया है और उसे बखुबी निभाया भी है. लेकिन उनकी मेहनत पानी मे गई है. मिनीषा लाम्बा आकर्षक लगती हैं, लेकिन सिर्फ ग्लेमर ही सबकुछ नहीं होता.
क्यों ना देखें:
फिल्म मे गिन ना सकें इतने झोल हैं. मिनीषा लाम्बा को 17 साल की लडकी दिखाया गया है लेकिन वे किसी कोण से 17 साल की नहीं लगती. ना ही वे संजय दत्त और विद्या मालवडे की बेटी लगती हैं. विद्या मालवडे संजय दत्त की पत्नी के रूप मे नहीं जचती. कुल मिलाकर स्टार कास्ट बनाने मे भारी चूक हुई है. संगीत साधारण है और सम्पादन भी.
अंत में:
फिल्म निराशाजनक है. कहानी घिसीपीटी है. जाने तु.. की कामयाबी के बाद इमरान खान को शायद पहली बार असफलता का स्वाद चखना पडे.
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