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समीक्षा
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शनिवार , , 11 अक्टूबर |
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एक अच्छी किताब पर एक अच्छी फिल्म बनाना हमेशा से मुश्किल रहा है. क्योंकि एक उपन्यास को फिल्म के रूप मे ढालना काफी कठिन कार्य होता है. अतुल अग्निहोत्री ने चेतन भगत की सबसे चर्चित उपन्यास वन नाइट एट कॉल सेंटर पर फिल्म बनाने की सोची, लेकिन वे इस उपन्यास के साथ न्याय करने मे असफल साबित होते हैं.
कहानी
फिल्म की कहानी आज के युग के नौजवनों की, तथा उनके संघर्षों की है. गुडगाँव के एक कॉल सेंटर में कार्यरत पाँच नौजवान और एक सेवानिवृत सेनाधिकारी अपने अपने जीवन से परेशान हैं. लेकिन एक दिन उनकी जिंदगी बदल जाती है जब उनमें एक के सेलफोन पर भगवान का कॉल आता है.
क्यों देखें:
फिल्म वैसे तो काफी कमजोर है, लेकिन शरमन जोशी का अभिनय अच्छा है. उन्होने फिल्म को थामे रखने की भरपूर कोशिश की है.
क्यों ना देखें:
फिल्म मे काफी कमजोरियाँ हैं. सबसे बडी कमजोरी तो पटकथा ही है जिसे खुद चेतन भगत और अतुल अग्निहोत्री ने लिखा है. फिल्म इतनी धीमी है कि दर्शक पहले 10 मिनट से ही बोर होने लगते हैं. सलमान ऐसे लगते हैं मानो अभी नींद से उठकर आए हों.
अंत में:
यह एक काफी कमजोर फिल्म है और बॉक्स ऑफिस पर इसके दम तोड़ देने के पूरे आसार हैं.
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