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2011 तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा सबसे बेहतर कृत्रिम हृदय |
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स्वास्थ्य
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शनिवार , , 01 नवम्बर |
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| हृदय रोग विशेषज्ञ एलन कार्पेंटियर |
2011 के बाद किसी भी हृदय के मरीज को जान का खतरा नहीं रहेगा. अगर ऐसा ना भी हो सका तो कम से कम, इतना तो कहा ही जा सकता है कि हृदय की बिमारी से पीड़ित अधिकांश व्यक्ति बच जाएँगे, क्योंकि तब तक दान में मिलने वाले हृदयों की कमी कोई समस्या नहीं रह जाएगी. वैज्ञानिकों का एक दल एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिससे 2011 तक पूरी तरह से कृत्रिम हृदय काम करना शुरू कर देगा.
जो टीम इस प्रोजेक्ट मे शामिल है उनमें शामिल हैं – एक बायोमेडिकल उद्यम “कार्मेट’, यूरोपीयन स्पेस एंड डिफेंस ग्रुप की भगिनी संस्था, फ्रांस की स्टेट इनोवेशन एजेंसी, वेंचर केपिटल फर्म ट्रफल और हृदय रोग विशेषज्ञ एलन कार्पेंटियर.
एलन के अनुसार अगले ढाई साल में एक पूर्णत: सक्षम कृत्रिम हृदय एक वास्तविकता होगा.
यह कैसे काम करेगा –
यह हृदय जानवरों के टिस्यू को केमिकल में प्रोसेस करके बनाया गया है. यह बायोपदार्थ इस तरह से बनाया गया है कि शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति इसे अस्वीकार नहीं करती है और ना ही इसमें खून जमा होता है.
यह हृदय अब तक उपलब्ध कृत्रिम हृदयों जैसे कि Jarvik-7 और AbioCor से बेहतर होगा, क्योंकि ऐसे हृदय लगभग 2 वर्षों के बाद बेकार हो जाते हैं. लेकिन यह नया हृदय इस तरह की तकनीक से बनाया जा रहा है कि इसके खराब होनी की सम्भावना एक दम कम होगी.
हर साल कम से कम 20000 लोग ऐसे होते हैं जिनकी मृत्यु अपने खराब हो चुके हृदय की जगह नया हृदय नहीं मिल पाता है. लेकिन 2011 के बाद यह दर कम हो जाएगी.
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कृत्रिम हाथ और पैर तो काम कर लेते हैं।
क्या कृत्रिम दिल वाले मुहब्ब्त कर सकेंगे?
उनका प्यार क्या सच्चा होगा?