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नरिमन हाउस पर हमले के तैयार एन.एस.जी.
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राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अथवा एन.एस.जी कमांडो फोर्स भारत का अत्याधुनिक आतंकवाद विरोधी दस्ता है. एन.एस.जी. कमांडो संकट की हर घडी में लडने और मर मिटने के लिए तैयार रहते हैं. अपने गठन के 23 साल के बाद आज एन.एस.जी. दूनिया की एक सबसे खतरनाक कमांडो यूनिट है.
एन.एस.जी. की स्थापना 1985 में की गई थी. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार अभियान के दौरान बडे पैमाने पर जान माल का नुकसान हुआ था और स्वर्ण मंदिर को भारी क्षति पहुँची थी. भारतीय सेना आतंकवादियों का सामना करने और अपनी ही जमीन पर छापामार युद्ध करने के लिए उतनी सक्षम नहीं थी.
इसलिए एक ऐसा दल बनाने का विचार रखा गया जो इस तरह के अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हो. उनके पास अत्याधुनिक हथियार हों और कठोर से कठोर स्थितियों में लडने के लिए वे काबिल हों.
1985 में संसद ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अधिनियम को पास कर एक संघीय सुरक्षा दल बनाया. इस दल का नाम राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड रखा गया.
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करते हैं और इनका मुखिया यानि कि डायरेक्टर जनरल आई.पी.एस. रेंक का अधिकारी होता है. इनका मुख्यालय पालम के पास मेहराननगर और प्रशिक्षण स्थल मानेसर, हरियाणा में है.
एन.एस.जी. का मुख्य काम है:
- बंधको को छुडाना
- आतंकवादियों को खत्म करना
- आपातकालिन स्थितियों मे देश की और नागरिकों की सुरक्षा करना
- धमाके के बाद जाँच करना
- बम निरस्त करना
- अति विशेष लोगों की सुरक्षा करना
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड को दो भागों मे बाँटा गया है. इसमे से एक स्पेश्यल ओपरेशन ग्रुप अग्रिम हमला दल होता है जिसके जिम्मे आतंकवादियों का सफाया करना और लोगों को बचाना होता है. इस दल के लिए भारतीय सेना से जवान चुने जाते हैं. दूसरा दल स्पेश्यल रेंजर ग्रुप होता है जो एस.ओ.जी. को सहायता प्रदान करते हैं और विशेष लोगों की सुरक्षा में तैनात होते हैं. इस दल के लिए सीमा सुरक्षा बल और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल से जवान लिए जाते हैं.
एन.एस.जी. कमांडो को कठोरतम प्रशिक्षण दिया जाता है. अपने प्रशिक्षण के दौरान एक वर्ष में एक कमांडो करीब 2000 राउंड गोलियाँ चलाता है. 85% सही निशाने लगाने वाला सिपाही ही आगे बढ सकता है, नहीं तो उसे निकाल दिया जाता है. अपने प्रशिक्षण के दौरान कमांडो को एक छद्म आदमी पर निशाना लगाना होता है जिसके ठीक पास में उसके साथी को खडा किया जाता है. निशाना चुकने का मतलब साथी की मौत होती है.
एन.एस.जी. के पास दूनिया के अत्याधुनिक हथियार हैं. इसमें से सभी हथियारों की जानकारी तो कभी बाहर नही आती है लेकिन उनके पास इज़रायल मे बनी 9mm उज़ी सब मशीनगन, 7.62mm PSG-1 स्नाइपर, हैकलर 512 12-गैज शोटगन, ग्लोक 17 और सिग सुर P226 9mm पिस्टल होती है.
इनके पास रात में देखने के यंत्र, जैमर, बोम्ब डिस्पोसल यूनिट आदि कई अन्य उपकरण भी होते हैं. त्रासदी के दौरान निर्णय लेने का काम पूरी तरह से कमांडो यूनिट पर ही छोडा जाता है. यहाँ तक कि यदि उनका कोई साथी दबाव में अथवा अन्य किसी कारणों से दूसरों के लिए खतरा बनता है तो इन्हे यह अधिकार है कि वे उसे मार दें.
एन.एस.जी. ने आज तक कई मिशनों मे अपनी क्षमता का परिचय दिया है. कई ओपरेशन तो कभी प्रकाश में नही आते हैं, लेकिन 1985 मे पंजाब, 25 अप्रेल 1994 का ओपरेशन मेघदूत (अगवा हवाई जहाज को बचाना), 25 सितम्बर 2002 का अक्षरधाम हमला और अब मुम्बई पर हमला प्रमुख है.