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मार्कोस: भारत के "गुप्त" रक्षक |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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शनिवार , , 29 नवम्बर |
मार्कोस! क्या यह नाम आपने पहले सुना है? नहीं सुना होगा. मार्कोस भारतीय नौसेना का गुप्त संगठन है. मार्कोस यानि कि मरीन कमांडोस एक अति गुप्त संगठन है, जिसके सदस्य सार्वजनिक तौर पर मुँह ढककर रखते हैं. ये लोग कभी प्रकाश में नहीं आते, लेकिन मुम्बई में 26 नवम्बर को हुई आतंकवादी घटना ने इस संगठन को प्रकाश में ला दिया.
इस फौज को “दाढीवाली फौज” कहा जाता है क्योंकि इसके सदस्य हमेशा दाढी बढाकर रखते हैं. वैसे इन्हे मगरमच्छ और छिपकली भी कहा जाता है. इसके सदस्यों की पहचान हमेशा गुप्त रहती है. कोई इनके बारे में नहीं जानता. इनको अपनी पहचान बताने की इजाजत नहीं है. कहा जाता है इनकी पत्नियाँ भी नहीं जानती कि उनका पति एक मार्कोस है.
मार्कोस की स्थापना 1987 में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की स्थापना के तुरंत बाद की गई थी. इनका काम है नौसेना द्वारा तटीय इलाकों पर धावा बोलने पर त्वरित कार्रवाही करना. लेकिन ये धरती, आकाश, जंगल कहीं भी लड सकते हैं.
इनको कठोर से कठोर ट्रेनिंग दी जाती है. कहा जाता है ट्रेनिंग के दौरान मात्र 10% योद्धा ही पास हो पाते हैं. ट्रेनिंग के दौरान इनके हाथ पाँव बांधकर इन्हे पानी में फेँक दिया जाता है. इतनी कठोर यातनाएँ झेलने के बाद ही एक कमांडो तैयार होता है.
इनके पास AK-47, Colt M16A2, INSAS 5.56 mm, Tavor एसाल्ट राइफल, HK MP5 सब मशीन गन और 7.62 mm SLR असाल्ट राइफल होती है.
मार्कोस के कारनामे:
- ऑपरेशन पवन: एल.टी.टी.ई. के खिलाफ – 1987
- ऑपरेशन केक्टस: मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को विद्रोहियों से बचाने के लिए. ऑपरेशन एकदम सफल रहा. सारे विद्रोही मारे गए थे.
- मार्कोस कश्मीर की वुलर झील पर तैनात रहती है और आतंकवादियों को इस रास्ते भारत नहीं आने देती.
- कारगिल युद्ध के दौरान
- एडन की खाडी में लुटेरों के खिलाफ, 11 नवम्बर 2008 को एक भारतीय जहाज छुडवाया.
- 27 नवम्बर 2008 को 25 मार्कोस का दल होटल ताज में घुसा और बंधकों को छुडाकर लाया.
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