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आतंकवादी हमला और सरकार का मसखरापन
देश दर्पण
सोमवार , , 01 दिसम्बर
तरकश ब्यूरो



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महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के बयानों और कार्यकलापों ने कॉंग्रेस और एनसीपी दोनों की मुश्किलें बढा दी है. एक तरफ गृहमंत्री आर.आर. पाटिल ने सवांददाताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि, मुम्बई जैसे बडे शहरों में ऐसी छोटी मोटी घटनाएँ हो जाती है. उनके इस बयान पर बवाल खडा हो गया.

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख होटल ताज का दौरा करते समय अपने बेटे और अभिनेता रितेश देशमुख और फ्लोप फिल्में बनाने के लिए मशहूर हो चुके निर्माता निर्देशक रामगोपाल वर्मा को लेकर गए. इससे उन्हें ना केवल शर्मिंदगी उठानी पड रही है बल्कि हर जगह सफाई भी देनी पड रही है.

कई लोग अब मजाक में कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री का मुख्य उद्देश्य इस त्रासदी के उपर फिल्म बनाने का लग रहा है जिसमें मुख्य भूमिका उनके बेटे निभाएंगे.


 




टिप्पणियाँ (1)add
`भारत में आतंकवाद `DIVIDE and RULE' और तुष्टिकरण की कार्यप्रणाली का परिणाम है'
द्वारा प्रेषित jagdishjain , दिसम्बर 01, 2008
`भारत में आतंकवाद `DIVIDE and RULE' और तुष्टिकरण की कार्यप्रणाली का परिणाम है'
भारत जैसी विविधता वाले देश में जिस उच्च कोटि के शासन-प्रशासन की ज़रूरत होती है वह केवल नेता जी सुभाष चंद्र बोस ही दे सकते थे. सुना है आज़ादी के समय इस देश के पॉलिटिशियन्स व गाँधी जी ने नेता जी के बारे में ऐसा कोई करार किया कि नेता जी ने फिर अपने को प्रकट ही नहीं किया. और इस देश की बाघ डोर सत्तालोलुपि, निकम्मों के हाथ आ गयी. 1952 के पहिले आम चुनाव में केवल 45.70% मत दाता मत देने निकले और उनमें से भी आधे से ज़्यादा ने कांग्रेस यानी कि नेहरू जी के विरुद्ध वोट डाले. इसके बावजूद भी नेहरू जी मई, 1964 तक सत्ता का सुख भोगकर गये. इस देश की तकदीर तो 1947 में ही फोड़ दी गयी थी. आज़ादी के 61 साल बाद नेहरू जी की `DIVIDE and RULE' की पॉलिसी पर चलकर लोग यानी कि पार्टियाँ सत्ता सुख भोग-भोगकर जा रही हैं. देश में एक भी पॉलिटीशियन ऐसा नही हुआ जिसने देश के हित में नैतिकता दिखाई हो, बिना बहुमत के शपथ लेने से मना किया हो. फूट डालकर राज करने का क्रम निरंतर जारी है और इस ही का कुपरिणाम जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र का अलगाववाद है, आतंकवाद, तुष्टिकरण की कार्यप्रणाली है. इस विषय में हाल ही में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ शब्द ज़रूर कहे थे नहीं तो कोई भी इस टॉपिक पर बोलने से कतराता है. जिस देश में आज़ादी के 61 साल बाद भी 40-50% लोग मत ही न डालते हो, जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र के आधार पर मत डाले जाते हो, किसी भी पार्टी को 25% मत भी न मिलते हो, वहाँ कैसा जनतंत्र. इसे भीड़ तंत्र, लुंगाड़ा तंत्र, लुच्चा तंत्र कहते हैं और इसके चलते देश का विनाश ही होता है. इतिहास इसका गवाह है. 1947 कि तुलना में आज देश पर क़र्ज़, देश का धन काले धन के रूप में स्विस बैंक में 1456 बिलियन डॉलर्स, हर चीज़ में मिलावट, शिक्षा के स्तर में गिरावट, आबादी पर कोई नियंत्रण नहीं, मिट्टी के तेल से कालाबाज़ारी, भ्रष्टाचार में निरंतर वृद्धि इसका प्रमाण है. अगर कुछ लोग समझते हैं कि देश की दशा वर्तमान शासन-प्रशासन प्रणाली के चलते सुधरेगी तो वें बबूल के पेड़ से आम की अपेक्षा कर रहे हैं जो कभी भी फलीभूत न होगी. देश को सही रास्ते पर ले जाने के लिए सही और सटीक कदम उठाने होगे. बहुमत को 50 प्लस से परिभाषित करना होगा, गुलामी की प्रशासन प्रणाली को बदलना होगा, सत्यवृत्ति जनों का मान सम्मान और भ्रषतों को गर्त में धकेलने की व्यवस्था करनी होगी. नियम उस कार्यप्रणाली को कहते है जिसकी सत्यता से यमराज भी झुक जाए और जिस प्रणाली से नंग-मलॅंगपॅना मच रहा हो उन्हें नियम नही कहते है. संसार में यह देश जनतंत्र का सबसे भौंडा संस्करण है. तत्काल इस देश को सेना के हवाले करके सुधार के कारगर कदम उठाए जाए, स्विस बैंक से काले धन वालों की सूची मंगाई जाए और उस धन को स्वदेश में लाने के कारगर कदम उठाए जाए. जो मनुष्य शिक्षित होकर भी प्रतिदिन कुछ मिनट अपने देश के हित के बारे में सोचने में और उन्हें कार्यान्वित करने में नहीं लगाते हैं, वें लोग संसार के निकृष्ट प्राणी होते हैं. आओ जागरूक नागरिक की तरह अपने देश के बारे में कारगर कदम उठाए.....?

इस देश के सुधार और समाधान के लिए के लिए चन्द पॉइंटस:
1. अगले 10 साल के लिए पाकिस्तान से सभी सम्बन्ध पूर्णत: समाप्त किए जाए.
2. चुनाव क्षेत्र के कम से कम 50% वोट पाने वाला प्रत्याशी ही विजयी घोषित होगा नहीं क्षेत्र प्रतिनिधि विहीन रखा जाएगा.
3. चुनाव सुधार के बिना अब कोई चुनाव नहीं.
4. प्रशासन प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन किया जाये.
5. स्विस बैंक में जमा 1456 बिलियन डॉलर्स की सूची मंगाकर पब्लिक में प्रसारित की जाए ताकि लोग असली चोरों, समाज/देश द्रोहियों को जान सकें.
6. अगले 10 साल के लिए देश को सेना के हवाले किया जाय.
7. योग्य और कर्मठ लोगों को ही पद दिए जाए, चोरों और निकम्मों को नही.
8. न्याय प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन किया जाये.
9. पब्लिक का दोहन/शोषण करने वालों, चीज़ों में मिलावट करने वालों, देश द्रोहियों को प्राण दंड दिया जाए.

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