संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण शाखा के लिए की गई एक शोध से साबित होता है कि एशियाई शहर खतरनाक भूरे बादलों की चपेट में आते जा रहे हैं.
इनवायरमेंट न्यूज नेटवर्क की इस शोध से पता चला है कि अधिकतर एशियाई शहरों में सूरज की 25% किरणें धरती तक पहुँच ही नहीं पाती है, क्योंकि प्रदूषण की वजह से बने भूरे बादल उन्हें आकाश में ही रोक लेते हैं. ये बाद कभी कभी तो 3 किलोमीटर गहरे होते हैं.
इससे सबसे अधिक प्रभावित शहर चीन का ग्वानजाउ है, जो 1970 से ही धुएँ के बादलों से घिरा हुआ है. इसके अलावा जिन शहरों पर सबसे अधिक खतरा है वे हैं बेंकाक, बिजींग, ढाका, कराची, कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, सिओल, शंघाई, शेनजाउ और तेहरान.
इस रपट के अनुसार इन बादलों मे मौजूद टोक्सिक पदार्थों की वजह से चीन में प्रति वर्ष 3,40,000 लोग मारे जाते हैं. ये टोक्सिक पदार्थ हिन्दू कुश और हिमालय पर्वत शृंखला के लिए भी खतरा है. इससे वहाँ के ग्लेशियर तेजी से पिघलते जा रहे हैं.
ऐसा खतरा यूरोपीय और अमरीकी महाद्वीप के देशों पर भी है, परंतु वहाँ होनी वाली शीतकालिन वर्षा और बर्फ की वर्षा इन बादलों को मिटा देती है.
लेकिन एशियाई शहरों मे बर्फीली वर्षा नहीं होती है, और वहाँ भूरे बादलों का खतरा लगातार बढ रहा है.