इंटरनेट पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार में अग्रणी संस्था हिन्द-युग्म के वार्षिकोत्सव में हंस के संपादक और वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र यादव ने कहा कि चूँकि इंटरनेट की दुनिया इतनी विस्तृत हो गई है, कम्प्यूटर जन-जन तक अपनी पहुँच बना चुका है इसलिए क्या पता नर्क यानी दोज़ख की भाषा भी यही हो, माध्यम भी यही हो। वो भी इतनी ही आधुनिक हो जाये। इसलिए मैं अपने अंतिम दिनों में यह जुबान सीख लेना चाहता हूँ। उन्होंने आगे कहा कि हिन्द-युग्म ने आज हिन्दी की इंटरनेटीय उपस्थिति बताकर मेरे सामने एक नई दुनिया खोल दी है। इस कार्यक्रम से पहले उन्हें ब्लॉगिंग के बारे में बिलकुल नहीं पता था।
राजेन्द्र यादव ने यह भी कहा कि हिन्दी प्रेमियों को विचारों से भी आधुनिक होना पड़ेगा। हमें खड़ी बोली से पहले के साहित्य को आल्मारियों में बंद कर देना चाहिए। वैचारिक और सामाजिक विकास की स्पर्धा के इस दौर में हमें बहुत आगे जाना है, अतः रास्ते का बोझ जितना हल्का हो उतना ही बढ़िया। उन्होंने एटामिक ऊर्जा की वक़ालत करने वाले ऐसे लोगों की भर्त्सना की जो माथे पर टीका लगाने और मंदिर के बाहर नारियल तोड़ने का पाखंड करते हैं।
राजेन्द्र जी के अलावा इस कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गणितज्ञ प्रो॰ भूदेव शर्मा, अंतर्राष्ट्रीय खेल कमेंटेटर प्रदीप शर्मा और कपार्ट, ग्रामीण विकास मंत्रालय के सदस्य डॉ॰ सुरेश कुमार सिंह अतिथि के तौर पर उपस्थित थे।
प्रो॰ भूदेव शर्मा का नाम विदेशों में हिन्दी का प्रचार-प्रसार करने वालों में बहुत सम्मान से लिया जाता है। प्रो॰ शर्मा ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही इंटरनेट को बहुत महत्व दिया है। अमेरिका में रहने वाला हर अप्रवासी भारतीय इंटरनेट से जुड़ा है और इंटरनेट पर हिन्दी में ही पढ़ना-लिखना चाहता है। इसमें बहुत संभावनाएँ हैं।
मीडिया से ३०-३२ वर्षों से जुड़े DU-FM के प्रोग्रेम ऑफिसर प्रदीप शर्मा ने हिन्दी के शब्दों का ठीक इस्तेमाल और ठीक उच्चारण पर बल दिया।
कपार्ट (ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार) में सदस्य डॉ॰ सुरेश कुमार सिंह ने कहा कि गाँवों के कम्प्यूटीकरण, गाँवों में कम्प्यूटर के प्रशिक्षण का प्रोजेक्ट बहुत ही उपयोगी है।
हिन्द-युग्म के संस्थापक शैलेश भारतवासी ने 'हिन्दी टाइपिंग और ब्लॉग-मेकिंग' पर पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण दिया और यह बताया कि कोई भी अधिकतम १० मिनट में हिन्दी टाइपिंग सीख सकता है और ब्लॉग बना सकता है।
वार्षिकोत्सव के आयोजन का यह सबसे बड़ा आकर्षण था। १५० से भी अधिक संख्या उपस्थित दर्शकों की भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि लोग ब्लॉगिंग सीखना चाहते हैं और अपनी भाषा में लिखना-पढ़ना चाहते हैं।
हिन्द-युग्म के कार्यक्रम में विविध रंग भरने हेतु युवा कवियों निखिल आनंद गिरि, गौरव सोलंकी, रूपम चोपड़ा, शोभा महेन्द्रू, नाज़िम नक़वी, मनुज मेहता, पावस नीर, अमित दहिया आदि का काव्य-पाठ भी हुआ। यूनिकवि गौरव सोलंकी, निखिल आनंद गिरि, नाज़िम नक़वी के काव्य-पाठ पर बहुत तालियाँ बजीं।
यह कार्यक्रम मुख्य रूप से ४ यूनिपाठकों को हिन्द-युग्म पाठक सम्मान २००८ से सम्मानित करने हेतु प्रकल्पित थी। चार यूनिपाठकों आलोक सिंह 'साहिल' , दीपाली मिश्रा, सुमित भारद्वाज और पूजा अनिल जिन्होंने हिन्द-युग्म को वर्ष २००८ में सबसे अधिक पढ़ा, को स्मृति चिह्न, प्रशस्ति-पत्र, पुस्तकों के बंडल भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन हरियाणा के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ॰ श्याम सखा 'श्याम' ने किया जिसका लोगों ने बहुत लुत्फ उठाया।