सत्यम के भूतपूर्व चैयरमेन रामलिंगा राजू ने एक चिट्ठी लिखकर अपनी कम्पनी मे चल रही भारी आर्थिक धांधली के बारे मे बॉर्ड के निदेशकों एवं कर्मचारियों को अवगत कराया. और इसके साथ ही भारत के कॉर्पोरेट जगत का एक सबसे बडा घोटला दूनिया के सामने आ गया.
इससे ना केवल सत्यम की साख गर्त में गई बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की आर्थिक छवि को भी ठेस पहुँची. रामलिंगा राजू ने पोज़ीगरी (अंग्रेजी में Ponzi Scheme) की प्रथा को आगे बढाया है.
क्या होती है पोंजी स्कीम:
पोंज़ी प्रभाव इटाली के घोटालेबाज चार्ल्स पोज़ी के नाम पर पडा है. पोज़ी प्रभाव उसे कहते हैं जब कोई व्यापारिक प्रतिष्ठान एक निवेशक के पैसे का इस्तेमाल दूसरे निवेशक का कर्ज़ चुकाने मे करने लगता है और कम्पनी की बैलेंसशीट से धोखाधडी करता है. वह शुद्ध लाभ को बढा चढा कर दिखाता है और कम्पनी के निवेशकों को धोखे मे रखकर उन्हें भारी आर्थिक क्षति पहुँचाता है.
चार्ल्स पोंज़ी और उसकी पोंज़ीगरी:
चार्ल्स पोंज़ी इटाली का निवासी था और रोजी रोटी की तलाश में अमेरिका आया था. 1903 मे जब वह अमेरिका पहुँचा तो उसके पास 2 पोंड भी नहीं थे.
अपना गुजारा चलाने के लिए उसने कई काम किए लेकिन संतुष्टी नहीं मिली. उसने कई व्यापार भी शुरू किए लेकिन उसे हमेशा असफलता ही हाथ लगी. एक दिन उसे एक पत्र मिला जो स्पेन से आया था. वह इंटरनेशनल पोस्टल रिप्लाय कूपन [आई.आर.एस.] था.
आई.आर.एस. का मकसद यह होता था कि, कोई भी व्यक्ति उसके माध्यम से दूसरे देश डाक भेज सकता था, और दूसरा व्यक्ति उसका इस्तेमाल डाकखर्च चुकाने में कर सकता था. आई.आर.एस. का मूल्य डाक भेजे जाने वाले देश में बेची जा रही डाक टिकट के मूल्य जितना ही होता था, लेकिन जब वह आई.आर.एस. किसी दूसरे देश भेजी जाती तो वहाँ उसी मूल्य की डाक टिकट खरीद कर उसका खर्च चुकाया जा सकता था. यदि दो देशों के मुद्रा का मूल्य अलग अलग हो तो इससे मुनाफा कमाया जा सकता था.
द्वितीय विश्वयुद्ध की वजह से इटाली मे मुद्रास्फिती की दर बढ गई थी और इटालियन मुद्रा का भाव डॉलर के मुकाबले गिर गया था. तो इटाली से आई.आर.एस. सस्ते भाव मे खरीद कर अमेरिका मे उसी आई.आर.एस. से महँगी डाक टिकटें खरीदी जा सकती थी और फिर उन्हे बेच कर मुनाफा कमाया जा सकता था.
पोंज़ी की योजना यह थी - बाहर पैसा भेजो, एजेंटो के माध्यम से आई.आर.एस. खरीदो, उन्हे अमेरिका मंगवाओ, उन आई.आर.एस. के बदले डाक टिकटे हासिल करो, और उन्हे बेचकर भारी मुनाफा कमाओ.
पोंज़ी ने एक सिक्यूरिटी एक्सचेंज कमिशन खोला और लोगों को उसकी स्कीम मे निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने लगा. उसने लोगों को भरोसा दिलाया कि वह उनके पैसे 90 दिन मे दुगने कर देगा.
लेकिन ऐसा हुआ नहीं. निवेश की जारी रकम उसने अपने निजि ऐशो आराम के लिए खर्च करनी शुरू कर दी. उसने भव्य विला बनवाए और आलिशान कारें खरीदी. उसने बडे पैमाने पर इंटरनेशनल रिप्लाय कूपन खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन दूनिया मे इतने अधिक कूपन थे ही नहीं. पोंज़ी की योजना खटाई मे पडने लगी लेकिन उसने निवेशकों को चूना लगाना जारी रखा. वह सब्जबाग दिखाता गया और एक निवेशक का पैसा दूसरे का कर्ज चुकाने मे लगाता गया. अंत मे उसका भांडा फूटा और उसे जेल जाना पडा. तब उसके पास मात्र 50 पॉंड बचे थे.
और भी हैं पोंज़ीगर:
दूनिया मे कई पोंजीगर हुए हैं. अर्थलिंक के संस्थापक रीड स्लाटकीन, ग्रेटर मिनिस्टर्स इंटरनेशनल चर्च, लुई पर्लमेन और बनार्ड मेडोफ जैसे कई अन्य पोंज़ीगर दूनिया में हुए हैं.