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क्या बंदर भी चेहरों से पहचान करते हैं? |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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शुक्रवार , , 13 फ़रवरी |
हम इंसानों के अंदर एक खूबी होती है, चेहरों से पहचान करने की. हम किसी जान पहचान वाले व्यक्ति के बच्चे को देखकर पहचान जाते हैं कि वह किस का बच्चा है. लेकिन क्या हमारे निकट के प्राणी यानी कि चिपांजी, बंदर और लगून भी ऐसा कर पाते हैं?
एलेक्जेंड्रा एलवर्ने, जो कि मोंटेप्लायर विश्वविद्यालय की मुख्य शोधकर्ता हैं, का तो यही मानना है. उन्होने अपनी शोध में कहा है कि, यदि इंसान चेहरों से पहचान कर सकते हैं तो बहुत सम्भव है कि इंसान के निकटवर्ती जानवर भी ऐसा कर पाते होंगे.
इसकी सबसे अधिक सम्भावना चिम्पाजी नस्ल के जानवरों की है. माना जाता है कि चिम्पाजी चेहरों की पहचान करने मे माहिर होते हैं. चिम्पाजीयों के समूह में अपने परिवार के सदस्यों को पहचानने की दक्षता उनमें नैसर्गिक रूप से होती है.
वैज्ञानिकों ने यह देखने के लिए कि क्या ऐसे अन्य प्राणियों के चेहरे इंसान पहचान पाते हैं, एक प्रयोग किया. उन्होने कुछ लोगों को कम्प्यूटर स्क्रीन पर चिम्पांजी, गोरिल्ला और मेन्ड्रिल की तस्वीरें दिखाई और उसके बाद तीन अन्य तस्वीरें उनके परिवार के सदस्यों की दिखाई. इन तीन में मात्र एक ही सही तस्वीर थी. लेकिन अधिसंख्य लोगों ने सही सदस्य को चुना. इससे साबित हुआ कि चिम्पाजी, गोरिल्ला आदि जाति के प्राणियों के चेहरे भी अपने परिवार के लोगों के चेहरों के साथ मेल खाते हैं. और इंसान उनमें मौजूद अंतर को पहचान पाते हैं.
इंसान की चेहरा पहचानने की यह खूबी सम्भवत: चिम्पाजी, गोरिल्ला और बंदरों मे भी होती है.
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