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सोश्यल नेटवर्किंग साइटें, संबंध बनाती नहीं बिगाड़ती है! |
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इंटरनेट
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सोमवार , , 23 फ़रवरी |
सोश्यल नेटवर्किंग साइटों के आगमन के बाद से लोगों ने एक नए किस्म का सामाजिक संबंध बना लिया है. अब अपरिचित और कभी ना मिले लोग भी परिचितों की तरह एक दूसरे की मदद करने लग गए हैं. यह सब सम्भव हुआ है ओर्कुट, फेसबुक, मायस्पेस जैसी सोश्यल नेटवर्किंग साइटों के आगमन की वजह से.
लेकिन क्या सबकुछ अच्छा ही है? दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है.
रोयल सोसाइटी ऑफ मेडिसीन के डॉ. एरिक साइमन के अनुसार, सोश्यल नेटवर्किंग साइटें लोगों को जोडने की बजाए तोडने का कार्य करती है. क्योंकि सोश्यल नेटवर्किंग साइटों की वजह से लोग आभासी दुनिया में जीने लगते हैं और वास्तविक रिश्तों को भूल जाते हैं. इससे लम्बे काल में बायोलोजिक असर भी पड सकता है.
डॉ. साइमन का मानना है कि सोश्यल नेटवर्किंग साइटों पर घंटों गुजारने वाले इंसान के जीन बदल सकते हैं, लम्बे काल के बाद उसका हार्मोन स्तर भी बदल जाता है और मानसिक स्वस्थता पर भी असर पडता है.
डॉ. साइमन का मत है कि लोगों को सोश्यल नेटवर्किंग साइटों के आभासी संसार की बजाए वास्तविक दुनिया के लोगों के साथ मेलजोल बढाना चाहिए.
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