newsite.jpg
ए. आर. रहमान, मोज़ार्ट ऑफ मद्रास - "जय हो!"
विशेष
मंगलवार , , 24 फ़रवरी
तरकश ब्यूरो



Image

दो आस्कर पुरस्कार अपनी झोली में डालने के बाद ए. आर. रहमान ने कहा, मेरे पास माँ है! उन्होनें अपनी सफलता अपनी माँ के नाम की. उन्होनें यह भी कहा कि जीवन में मेरे सामने प्रेम और नफरत रूपी दो विकल्प थे, मैने प्रेम चुना और आज यहाँ हूँ.

ए. आर. रहमान आज भारत ही नहीं बल्कि समस्त विश्व के सबसे अधिक प्रतिभाशाली संगीत निर्देशकों मे से एक माने जाते हैं. रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को चैन्नई में हुआ था. उनका मूल नाम ए. शेखर दिलीप कुमार था. संगीत के प्रति उनको शुरू से ही रूची थी. मात्र चार साल की उम्र में वे पिआनो बजाने लग गए थे.

उनके पिता के.ए. शेखर भी अच्छे संगीत निर्देशक थे. रहमान ने 16 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड दी और अपने पिता के नक्शे कदम पर चलने लगे. उनकी प्रतिभा को सबसे पहले मशहूर संगीतकार इलैयाराजा ने पहचाना, जिन्होने रहमान को अपना शिष्य बनाया.

संगीतकार के रूप मे रहमान का शुरूआती जीवन संघर्षों से भरा था. उन्होने टीवी विज्ञापनों के लिए जिंगल बनाए और मात्र 5 साल में 300 से अधिक धूनें रच दीं.

उसके बाद उन्होनें फिल्मो मे संगीत देने की सोची. उन्हें सबसे पहला ब्रेक मणीरत्नम ने दिया. 1992 में आई मणीरत्नम की फिल्म रोज़ा के संगीत ने रहमान को बुलंदी तक पहुँचा दिया. इस फिल्म का संगीत इतना लोकप्रिय हुआ कि फिर रहमान को कभी पीछे मुडकर देखने की फुर्सत ही नहीं मिली.

  • उन्होने लीयो कॉफी के विज्ञापन के लिए संगीत दिया, जिसको बाद मे पुरस्कार भी मिला
  •  रोज़ा के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत के तीन पुरस्कार मिले
  • 1997 मे सोनी म्यूजिक के साथ तीन साल का अनुबंध करने वाले पहले भारतीय संगीतकार बने
  • आज़ादी की 50वीं सालगिरह के मौके पर वन्दे मातरम को अपने अंदाज में पेश किया. यह उनका पहला एल्बम भी था.
  • रहमान रात में काम करते हैं. उनके लगभग सभी गीतों की रिकार्डिंग रात मे होती है. दिन के समय उनके सभी तकनीकविद सोते हैं. और रात मे जागते हैं.
  • किसी फिल्म को साइन करने से पहले वे फिल्म की कथा, पटकथा और कलाकारों के बारे में जानकारी एकत्रित करते हैं.
  • वे किसी भी गायक के सुझाए बदलाव मानते नही है. यदि गायक अधिक दबाव डाले तो वे गायक को बदल देते हैं.
  • किसी गीत की धून बनाने के बाद वे पहले खूद गाते हैं और मूल गायक को सुनाते है
  • रहमान किसी भी आवाज को व्यर्थ नही जाने देते. मसलन उनकी लाइब्रेरी मे कई गायकों की विभिन्न आवाजें – खांसी, छींक – आदि उपलब्ध है. वे इनका उपयोग समय समय पर करते हैं. उदाहरण के लिए एक तमिल गाने मे उन्होने अपनी खांसी की आवाज शामिल की. वह वास्तविक खांसी थी. 



टिप्पणियाँ (0)add
टिप्पणी लिखें
quote
bold
italicize
underline
strike
url
image
quote
quote
smile
wink
laugh
grin
angry
sad
shocked
cool
tongue
kiss
cry
smaller | bigger

security image
दिखाये गये अक्षर लिखें


busy
 

सबस्क्राइब करें

ईमेल में:


ईमेल में प्राप्त करें

ईमेल आईडी लिखें



हमारे साथ

इस समय 18 अतिथि ऑनलाइन है