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9 ऐसी बातें जो आप शायद इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन [EVM] के बारे में ना जानते हों |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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बुधवार , , 18 मार्च |
16 अप्रैल 2009 लोकसभा के चुनाव होने जा रहे हैं. इस बार लोकसभा की सभी 543 सीटॉं पर इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन से मतदान करवाया जाएगा.
आइए देखते हैं इस मशीन से जुड़ी 15 रोचक बातें:
- इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन [EVM] मतदान करवाने पर करीब 10 हजार टन कागज की बचत होती है.
- भारत में इलैक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन [EVM] का सबसे पहली बार इस्तेमाल सन 1982 में केरल के परूर विधानसभा क्षैत्र में किया गया था.
- इवीएम का इस्तेमाल उन गाँवों मे भी किया जा सकता है जहाँ बिजली नहीं है, क्योंकि इवीएम बैटरी से चलती है.
- एक इवीएम 3840 वोट रजिस्टर कर सकती है. वैसे यह काफी है, क्योंकि एक पोलिंग बूथ पर करीब 1500 वोटर रजिस्टर होते हैं.
- यदि किसी क्षैत्र में 64 से अधिक उम्मीदवार चुनाव लड रहे हों तो वहाँ इवीएम से मतदान नहीं हो सकता. वजह यह है कि इवीएम 64 उम्मीदवारों के नाम ही संग्रहित रख सकती है.
- इवीएम अत्याधुनिक तकनीक से बनी है. यदि कोई व्यक्ति इसकी बैटरी निकाल लेता है तो भी आँकड़े मिटते नहीं हैं. इसकी चिप पर से आँकडे एक विशेष सोफ्टवेर से ही मिटाए जा सकते हैं.
- इवीएम किसी भी प्रकार के धक्के अथवा पटकने से खराब नहीं होती ना ही उसके अन्दर संग्रहित हो रहे आँकडे मिटते हैं.
- इवीएम के इस्तेमाल की एक बड़ी कमी यह है कि इससे यह पता चल जाता है कि किस क्षैत्र के लोगों ने किस उम्मीदवार को अधिक वोट दिया. सन 2004 के चुनावों के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर छापी थी कि मुम्बई के कांदिवली इलाके के लोगों ने गोविंदा को अधिक वोट दिए तो बोरिवली ने राम नायक को!
- 2004 के आम चुनावों मे 10 लाख 75 हजार इवीएम का इस्तेमाल हुआ था.
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