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इंटरनेट के मैदान में छिड़ी कोनफ्लिकर और कोनफ्लिकर केबल के बीच जंग |
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इंटरनेट
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शुक्रवार , , 20 मार्च |
कोनफ्लिकर, यह उस कम्प्यूटर वाइरस का नाम है जिसने अब तक लाखों कम्प्यूटरों को ग्रसित किया है और जिसके प्रोग्राम लेखक का अभी तक पता नहीं चला है. स्थिति इतनी विकट है कि माइक्रोसॉफ्ट ने कोनफ्लिकर का प्रोग्राम लिखने वाले प्रोग्रामर अथवा प्रोग्रामरों की टीम का सुराग देने वाले व्यक्ति को 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम देने की घोषणा की है.
यही नहीं कुछ स्वयंसेवियों तथा डुमेन नेम का निर्धारण करने वाली संस्था आइकेन ने मिलकर एक टीम बनाई है जिसे कोनफ्लिकर केबल नाम दिया गया है. यह टीम कोनफ्लिकर वाइरस के असर को निरस्त करने के लिए दिन रात जूटी रहती है.
इस समय कोनफ्लिकर प्रोग्राम लिखने वाली टीम और कोनफ्लिकर केबल टीम के बीच चुहे बिल्ली वाला खेल चल रहा है. क्योंकि कोनफ्लिकर के लेखक हर दूसरे दिन उसके कोड में बदलाव कर उसे अपडेट करते जाते हैं और कोनफ्लिकर केबल टीम उसका तोड निकालती जाती है.
क्या करता है यह वाइरस: कोनफ्लिकर एक प्रकार का मेलवेर है. किसी भी सिस्टम में प्रवेश करने के बाद वह उसका सम्पर्क किसी दूसरे मेलवेर सर्वर के साथ स्थापित कर देता है और इससे कई प्रकार के एडवेर और मैलेशियस स्क्रिप्ट प्रयोक्ता के सिस्टम में आ जाती है. धीरे धीरे प्रयोक्ता का सिस्टम जाम हो जाता है और कार्य करना बंद कर देता है.
इसके अलावा प्रयोक्ता की महत्वपूर्ण जानकारियाँ जैसे कि क्रेडिट कार्ड की डिटेल आदि भी लीक हो जाती है.
अब तक यह पता नहीं चला है कि कोनफ्लिकर का प्रोग्राम किस स्थान से लिखा जाता है. लेकिन कुछ साइबर विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसे पूर्वी यूरोप के किसी स्थान से लिखा जा रहा है.
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