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चेहरे का बारकोड, जिससे पहचान होगी आसान |
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तकनीक
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बुधवार , , 15 अप्रेल |
बारकाड के अविष्कार के बाद से बाजार में खरीददारी करना आसान हो गया है. सुपरमार्केट में वस्तुएँ खरीदने के बाद आप जब काउंटर पर पैसे चुकाने के लिए खड़े होते हैं तो आपको लम्बे समय तक अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पडता. क्योंकि बारकोड लगे स्टीकरों की मदद से विक्रेता तेजी से वस्तुओं की कीमत जोड लेता है.
क्या यही तकनीक हम इंसानों पर भी लागू की जा सकती है? क्या इंसान के चेहरे का भी बारकोड बन सकता है?
यदि लंडन की यूनिवर्सिटी कालेज के स्टिवन डाकिन और रोजर वाट की मानें तो यह सम्भव हैं. इन दोनों का मानना है कि प्रकृति ने हमारे चेहरों पर ‘बारकोड” अंकित किए हैं.
आप अपने चेहरे को ध्यान से आइने में देखिए. सिर के भाग से लेकर गले तक आपको समानांतर रेखाएँ दिखाई देंगी. आँखों की शुरूआत-अंत, नाक के नथुने, होठ आदि समानांतर रेखाएँ खिंचते हैं और हर व्यक्ति के चेहरे पर ये रेखाएँ अलग माप की होती हैं.
प्रोफेसर डाकिन का कहना है कि प्रकृति हमको प्राकृतिक रूप से बारकोड तकनीक उपलब्ध करवाई है. अब हमें चेहरे पहचानने वाले सोफ्टवेरों को और अधिक विकसित कर इस नई खोज के अनुसार ढालना होगा. उसके बाद हम भीड़ में मौजूद किसी भी वांछित व्यक्ति की पहचान आसानी से कर पाएंगे.
यह नई तकनीक सुरक्षा एजेंसियों के काफी काम आएगी. इस नई शोध के बारे में जानकारी विजन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई है.
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