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"टोटलाइजर सिस्टम" से बनेगा गुप्त मतदान वाकई में गुप्त
रोचक तथ्य और जानकारी
गुरुवार , , 16 अप्रेल
तरकश ब्यूरो



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जब मतदान के लिए ईवीएम मशीनों का प्रयोग नहीं होता था तब बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता था. उस पद्धति में अलग-अलग बूथ के मतों को अंत में मिला दिया जाता था और फिर गिनती की जाती थी. इससे यह पता नहीं चलता था कि कौन से बूथ के मत कौन से हैं.

लेकिन इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के आने से यह पद्धति बदल गई है. क्योंकि ईवीएम में दर्ज मतों को दूसरी मशीन के मतों से मिलाया नहीं जा सकता. लिहाजा यह आकलन लग जाता है कि किस बूथ से किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले.

दूसरे शब्दों में अब यह आकलन लगाया जा सकता है कि किस क्षैत्र के लोगों ने किस उम्मीदवार को वोट दिया. पिछले लोकसभा चुनाव में एक अखबार ने छापा भी था कि बोरिवली के लोगों ने गोविंदा और कांदीवली के लोगों ने राम नाइक को वोट दिया.

इससे यह प्रश्न उठता है कि गुप्त मतदान वाकई में "गुप्त" रह गया है.

लेकिन अब चुनाव आयोग एक टोटलाइजर सिस्टम विकसित करवा रहा है. इसके तहत कई मतदान केंद्रों के ईवीएम में दर्ज मतों को एक साथ मिला कर उसके बाद उनकी गिनती किए जाने की व्यवस्था होगी.

उम्मीद है कि अगले लोकसभा चुनावों तक यह प्रक्रिया अमल में आ जाएगी और गुप्त मतदान फिर "गुप्त" ही रहेगा.

 



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