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परम्परागत खिलौनों से बच्चों का अधिक विकास होता है |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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गुरुवार , , 21 मई |
आजकल कम्यूटर गेम और प्लेस्टेशन का जमाना है लेकिन बाल मनोवैज्ञानिकों का मत है कि बच्चे यदि परम्परागत खिलौनों से खेलें तो उनका मानसिक विकास अधिक होता है.
कई मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे यदि परम्परागत खेल खेलें तो उनमें नैतृत्व क्षमता का विकास होता है, कल्पनाशक्ति बढती है और सहायता करने की आदत मजबूत होती है.
ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड विश्वविद्यालय के डॉ. जोन जुरेदिनी के अनुसार इलैक्ट्रोनिक खिलौनों तथा कम्प्यूटर गेमों के बढ रहे चलन से बच्चों का रचनात्मक विकास कम हो रहा है.
एक ब्रिटीश अखबार को दिए साक्षात्कार में उन्होने कहा कि ‘असली खतरा यह है कि इस तरह के खेलों को अपनाने से बच्चों में रचनात्मक विकास अवरूद्ध हो जाता है क्योंकि इलैक्ट्रोनिक खेलों और कम्यूटर गेम खेलने के दौरान उन्हें अधिक सोचना नहीं पड़ता और ना ही अपनी कल्पनाशक्ति का अधिक इस्तेमाल करना पडता है.
इसके अलावा बच्चों में बातचीत करने की कला भी कमजोर होती है. परम्परागत खेलों में बच्चों को टीम बनाकर खेलना पडता है, इससे समूह में काम करने की आदत पडती है और नैतृत्व क्षमता का विकास होता है. इलैक्ट्रोनिक खेल खेलने से यह विकास भी अवरूद्ध होता है.
चिकित्सकों का मानना है कि बच्चों को अधिक से अधिक समय परम्परागत खेल खेलने चाहिए.
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