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तकनीक ने किया बच्चों को प्रकृति से दूर
पर्यावरण
मंगलवार , , 26 मई
तरकश ब्यूरो



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आज की दुनिया के बच्चे ऐसे माहौल में जी रहे हैं जहाँ विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों में हुई क्रांति की वजह से उन्हें कई प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध हैं. आज के बच्चे पहले की तुलना में जल्दी सिखते हैं और उनके लिए भौतिक सुविधाओं तक पहुँच आसान हुई है. लेकिन इस वजह से बच्चे प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं.

एचएसआई डिपार्टमेंट ऑफ लेंगुएज, लिटरेचर एंड कम्यूनिकेशन के नाथन फ्रिएर के अनुसार तकनीक के विकास से बच्चों को अभूतपूर्व लाभ पहुँचा है. लेकिन आज तकनीक और प्रकृति में सही संतुलन स्थापित करने की जरूरत है. तकनीक जरूरी है और हमारी जिंदगी को आसान बनाती है लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रकृति के बिना हम जिवित नहीं रह सकते.”

एक ब्रिटिश अखबार में छपी खबर के अनुसार, आज के जमाने के बच्चे प्रकृति के साथ सीधे सम्पर्क को खो रहे हैं. आज वे प्रकृति को मात्र टीवी के माध्यम से जानते हैं.

आज बच्चे अपने साथ आईपोड जैसे डिवाइज़ रखते हैं, कम्प्यूटर गेम खेलते हैं और डिस्कवरी चैनल देखते हुए बडे होते हैं. यह सब कुछ वैसा ही है जैसा कुछ दशकों पहले विज्ञान कथाओं में वर्णित किया जाता है. लेकिन इससे बच्चों का बगीचों मे घूमने जाना और पेड पर चढना – इस तरह के कार्यकलाप बंद ही हो गए हैं.

बच्चे अपने आसपास के वातावरण को टीवी या पत्रिकाओं या फिर इंटरनेट पर मौजूद ज्ञानकोषों के माध्यम से जानते हैं लेकिन इसका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं करते. इसका घातक असर उनके बड़े होने पर पड सकता है. आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं और भविष्य का मानव प्रकृति से और भी अधिक दूर होगा.



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