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जल्द ही बनेंगे “सोचने” वाले सर्च इंजिन |
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इंटरनेट
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सोमवार , , 08 जून |
इंटरनेट पर सर्च इंजिन के माध्यम से की जाने वाली खोज हमेशा सही नतीजे ही नहीं देती. कितनी ही बार ऐसा होता है कि जिस चीज की हमें खोज करनी होती है अपने पहले प्रयास में हमें वह नहीं मिलती और हमें हमारे खोज शब्द उलट पलट करने या बदलने पड़ते हैं.
लेकिन यदि यही काम सर्च इंजिन ही कर ले तो! ऐसा हो सकता है यदि पेन स्टेट के सूचना और प्राद्योगिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर जिम जेसन की शोध को महत्व दिया जाए और उनकी खोज को सर्च इंजिन बनानी वाली कम्पनियाँ अपने प्रोग्राम में शामिल करे. जिम जेसन ने करीब 10 लाख खोज शब्दों का विश्लेषण किया है और खोज करने के तरीकों की पद्धति विकसित कर एक ऐसा मॉडल बनाया है जो शब्दों को पढकर उसके हिसाब से खोज करता है और सर्च इंजिन को अपने आप नजदीक के खोज शब्द उपलब्ध करवा कर प्रयोक्ता की राह आसान बनाता है.
जिम जेसन ने अपनी शोध में पाया कि लगभग 22% लोग खोज करते समय सही नतीजे नहीं प्राप्त करते और अपने शोध शब्दों मे बदलाव करते हैं. यह काम किसी सोफ्टवेर से करवाया जा सकता है.
जेंसन के अनुसार – खोज करने वाला व्यक्ति छोटे खोज शब्द देता है और फिर नतीजे नहीं मिलने पर उनमें बदलाव करता है और अधिक तथ्यपरक शब्द शामिल करता है. लेकिन यही काम सोफ्टवेर भी कर सकता है.
जेंसन के अनुसार उनकी तकनीक नए जमाने के सर्च इंजिन बनाने की दिशा तय कर सकती है.
तो भविष्य में ऐसे सर्च इंजिन उपलब्ध होंगे जो ना केवल खोज नतीजें देंगे बल्कि खोज करने में आपकी मदद भी करेंगे.
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