केरल के रेजी कुमार के घर लोगों का हुजूम लगा है जो प्रार्थना कर रहे हैं और माथा टेक रहे हैं. लेकिन सामने किसी भगवान की मूर्ति नहीं है बल्कि बोतल में बंद एक मेढक है जो कि कथित तौर पर रंग बदलता है.
तिरूअनंतपुरम के 35 वर्षीय रेजी कुमार को यह मेढक जब मिला तब वह झक सफेद रंग का था. उन्हें उसे देखकर कुतुहल हुआ और वे उसे अपने घर ले आए. लेकिन जब रेजी कुमार घर पहुँचे तो उन्होने देखा कि उस मेढक का रंग पीला हो गया था और बाद में हल्का काला हो गया. रेजी ने उस मेढक को एक बोतल में बंद कर दिया और उनके आश्चर्य के बीच रात घिरते घिरते उस मेढक का रंग गहरा पीला हो गया.
रेजी के अनुसार उसके बाद तो उस मेढक का रंग गायब हो गया और उसकी चमडी पारदर्शी हो गई और उसके शरीर के अंदर के अवयव दिखाई देने लगे.
ब्रिटिश अखबार
द सन की खबर के अनुसार स्थानीय लोगों को जब यह बात पता चली तो उन्होने उस मेढक को देवता का स्वरूप समझ लिया और पूजा अर्चना शुरू कर दी.
लेकिन ऐसा कैसे हो रहा है?
केरल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उम्मन के अनुसार जानवर अपनी रक्षा करने और सम्भावित खतरे को डराने के लिए रंग बदलते हैं. यह असामान्य नहीं है. लेकिन रेजी के मेढक का इतनी तेजी से इतने रंग बदलता जरूर असामान्य है और इसकी जाँच की जानी चाहिए.
इस बीच जीयोलोजिक सर्वे ऑफ इंडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार जीव वैज्ञानिकों ने वर्ष 2008 के दरम्यान देश में से मेढकों की 12 नई प्रजातियाँ ढूंढी है. इन प्रजातियों मे से एक प्रजाति अरूणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले के वनों में से मिली है. इस प्रजाति के मेढक लगातार रंग बदलते हैं.
हो सकता है रेजी का मेढक भी ऐसी ही किसी प्रजाति का हो.