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यदि चन्द्र अभियान असफल रहता तो क्या कहते अमेरिकी राष्ट्रपति? |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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बुधवार , , 24 जून |
आज तक यह बात गुप्त थी, लेकिन अब एक ब्रिटिश अखबार द टेलिग्राफ ने इस रहस्य को उजागर किया है.
जुलाई 21, 1969 का दिन अमेरिका ही नहीं विश्व के लिए भी ऐतेहासिक दिन था, क्योंकि इस दिन अमेरिका के अंतरीक्षयात्री नील आर्मस्ट्रांग ने पहली बार चन्द्रमा की धरती पर कदम रखा था.
नील आर्मस्ट्रांग ने कहा था - इंसान का यह छोटा कदम मानवता के लिए एक लम्बी छलांग है.
लेकिन यदि यह अभियान असफल होता तो? यदि नील आर्मस्ट्रांग और उनके साथियों की मृत्यु हो जाती तो?
तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इसकी भी तैयारी कर ली थी. उनके भाषण लेखक बिल सफायर ने एक मसौदा तैयार किया था जो रिचर्ड निक्सन राष्ट्र के नाम संबोधन में पढते.
यह भाषण कुछ इस प्रकार का होता -
देशवासियों, नियती ने तय किया है कि जो व्यक्ति चन्द्रमा पर शांति की खोज में गए हैं वे चन्द्रमा पर ही चिर शांति प्राप्त करेंगे. ये बहादूर व्यक्ति जानते हैं कि वे वापस नहीं आ पाएंगे लेकिन वे ये भी जानते हैं कि इस बलिदान की वजह से मानवता के लिए उम्मीद की किरण उत्पन्न होगी.
इन दो बहादूर व्यक्तियों ने मानवता की सबसे ऊँची मिसाल कायम करते हुए बलिदान दिया है. इन्होने सत्य और समझ की खोज की है.
उन्हें उनका परिवार और मित्र याद रखेंगे, उन्हें यह देश याद रखेगा, उन्हें दुनिया याद रखेगी और उन्हें धरती माँ याद रखेगी जिसने अपने दो सपूतों को अनजानी दुनिया की खोज पर भेजा.
इंसान की खोजयात्रा रूकेगी नहीं और ये बहादूर हमेशा हमारे हृदय में जीवित रहेंगे.
लेकिन निक्सन को यह भाषण देने का अवसर नहीं मिला. निक्सन खुश ही होंगे कि नहीं मिला!
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