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- सन 2100 तक समुद्री सतह 20 सेमी से 60 सेमी तक बढ जाएगी
- छोटे द्विप समूहों जैसे कि मालदीव, मोरिशियस और सेशेल्स आदि को भारी खतरा है
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समुद्र की सतह लगातार बढ रही है, समुद्र में पानी भर रहा है और समुद्री किनारे तेजी से विलुप्त होते जा रहे हैं. यह खतरे का संकेत है क्योंकि यदि यह क्रम जारी रहा – और पूरी सम्भावना है कि जारी रहेगा – तो एक दिन दुनिया के अधिकांश हिस्से डूब जाएंगे!
द टेलिग्राफ में छपी एक खबर के अनुसार दुनिया भर के शीर्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्री की सतत का बढना लगातार जारी रहेगा और यह क्रम कुछ सालों तक नहीं बल्कि सदियों तक जारी रहेगा और इसे रोक पाना अब लगभग नामुमकिन है.
स्थिति यहाँ तक बिगड़ चुकी है कि यदि प्रदुषण के स्तर को तुरंत प्रभाव से शून्य भी कर दिया जाए तो भी ग्लेशियरों का पिघलना और बर्फ का समुद्री पानी में मिलना कम नहीं होगा.
पहले अनुमान लगाया गया था कि सन 2100 तक समुद्री सतह 20 सेमी से 60 सेमी तक बढ जाएगी लेकिन अब इस तथ्य को अपूर्ण माना जा रहा है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस समय के दौरान समुद्री सतह 1 या 2 मीटर और कहीं कहीं तो उससे भी अधिक बढ जाएगी. और क्रम मात्र 2001 तक सिमित नहीं रहेगा बल्कि जारी ही रहेगा.
इसका व्यापक असर उन इलाकों में होगा जो ढलान पर स्थित हैं. एशिया के बांग्लादेश तथा कुछ छोटे द्विप समूहों जैसे कि मालदीव, मोरिशियस और सेशेल्स आदि को भारी खतरा है. ये द्विप पूरी तरह से डूब जाएंगे.
इसके अलावा भारत के मुम्बई, पाकिस्तान के कराची तथा अन्य उन बडें शहरों पर भी खतरा मंडरा रहा है जो समुद्री तट पर स्थित हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि न्यूयार्क, फ्लोरिडा, लंडन, टोक्यो तथा इन एशियाई शहरों को बचाने के लिए अभी से कमर कसने की जरूरत है. इसके लिए इंजीनियरिंग दक्षता का परिचय देते हुए कुछ ऐसे निर्माण कार्य करने होंगे जो समुद्री पानी से इन शहरों को बचा सके.