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खुशी की खोज; जिनेटिक खुशी की सम्भावना तलाश रहे हैं वैज्ञानिक
विज्ञान
शनिवार , , 04 जुलाई
तरकश ब्यूरो



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हमारे दुख या खुशी का क्या हमारे जिनेटिक ढांचे से कोई लेना देना है? क्या इंसान की खुशी का जिनेटिक सम्पादन किया जा सकता है?
 
तेल अवीव विश्वविद्यालय के योराम बराक का मानना है कि यह हो सकता है.
बराक उन वैज्ञानिकों मे से हैं जो उस जिन की तलाश कर रहे हैं जो खुशी देता है. बराक का मानना है कि इंसान के शरीर में खुशी देने वाला जिन जरूर होगा.

बराक के अनुसार इंसान की खुशी दो कारकों पर निर्भर करती है. एक उसके आसपास का भावनात्मक वातावरण और दूसरा उसके शरीर के अंदर मौजूद खुशी देने वाले जिन की सरंचना.

जब आर्थिक विषमता हो, तनाव हो या असाध्य बिमारी हो तो स्वाभाविक रूप से इंसान को खुशी महसूस नहीं होती पर साथ साथ ही इंसान को तब भी खुशी महसूस नहीं होती जब उसके शरीर में खुशी देने वाले जिन की सरंचना में गडबडी हो. योराम बराक के अनुसार इंसान की 50% खुशी तो इसी जिन के ऊपर आधारित है और वे इस समय इसी जिन की पहचान करने में जूटे हैं. यह आसान काम नहीं है लेकिन बराक को उम्मीद है कि एक दिन उस जिन की पहचान हो जाएगी.

और बाकी की 50% खुशी के लिए बराक एक वर्कशोप चलाते हैं जहाँ लोगों को यह सिखाया जाता है कि विषम परिस्थितियों में खुश कैसे रहा जाए. और इसके नतीजे भी उत्साहवर्धक मिले हैं. उनका वर्कशोप करने वाले 30% लोगों ने अपने जीवन में खुशी को अधिक मात्रा में महसूस किया.


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