चीन के उत्तर पश्चिम में स्थित है शिनचियांग प्रांत. शिनचियांग मूल उइगर मूल के लोगों का क्षेत्र है जिसपर चीन ने कब्ज़ा कर रखा है.
शिनचियांग के उइगर मूलत: तुर्क समुदाय के हैं. शिनचियांग चीन की कुल भूमि का छठा हिस्सा है.
एक अनुमान के अनुसार इस रेगिस्तान प्रदेश में इस समय करीब 1 करोड़ उइगर समुदाय के लोग रहते हैं जो अपने इलाके में चीन की दखल को पसंद नहीं करते और चाहते हैं कि उन्हें स्वतंत्रता हासिल हो.

दूसरी तरह मूल चीनी सभ्यता के हान समुदाय के लोग हैं जिन्हे सरकार ने प्रोत्साहित कर शिनचियांग में बसाया है. यह सिलसिला 1949 में शुरू हुआ था. उस समय शिनचियांग में हान मूल के लोगों की संख्या महज 6% थी, लेकिन आज उनकी आबादी करीब 40% तक है. शिनचियांग में हान समुदाय के बढते वर्चस्व का ही नतीजा है कि उगीरों और हान लोगों के बीच संघर्ष अब आम हो गया है. शिनचियांग की अर्थव्यवस्था पर हान समुदाय ने लगभग कब्जा कर रखा है.
जैसा कि चीन के एक नागरिक अधिकार संस्था से जुडे निकोलस बेकेलिन बताते हैं – मूल रूप से उगीर और हान लोगों के बीच का संबंध भूमिहार और जमीँदार जैसा रहा है.
चीन की पाबंदियाँ:
चीन ने उइगर प्रांत के मूल मुस्लिम समुदाय पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा रखी है. सरकारी उगीर अधिकारियों को नमाज अदा करने की इज़ाजत नहीं है. इमाम निजी तौर पर कुरान की शिक्षा नहीं दे सकते. रमज़ान के त्यौहार और हज यात्रा पर भी कड़ाई लागु की गई है. छात्रों और सरकारी अधिकारियों को रमज़ान के महिने के दौरान आहार लेना ही होता है. इसके अलावा सरकार उगीरों के पासपोर्ट भी जब्त कर लेती है ताकी वहाँ के व्यापारी मुक्त रूप से विदेश यात्रा ना कर सके.
लेकिन चीन ने मात्र पाबंदियाँ ही नहीं लगाई है. चीन उइगरों को कई प्रकार की सुविधाएँ भी देता है.
उइगरों को सुविधाएँ:
उइगर महिला एक से अधिक बच्चे को जन्म दे सकती है जबकि मूल हान महिला ऐसा नहीं कर सकती. उइगर छात्रों को विद्यालयों तथा कॉलेजों में भी अतिरिक्त सुविधाएँ दी जाती है.
लेकिन इसके साथ ही चीन द्वारा उइगर सभ्यता के सांस्कृतिक खात्मे की पूरी तैयारी कर ली गई है. शिनचियांग में अधिकतर पढाई मेंड्रियन भाषा में करवाई जाती है और उइगर भाषा का वर्चस्व कम हो रहा है. 1990 में उच्च शिक्षा में उइगर भाषा का विकल्प रद्द कर दिया गया था 2006 में सरकार ने बालशिक्षा के लिए चीनी भाषा को मुख्य भाषा बना दिया.
विवाद की जड़:
विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान विवाद की जड़ आर्थिक विषमता है. उइगर समुदाय मानते हैं कि चीन के अन्य प्रांतो से लाए गए लोग उनपर हावी हो रहे हैं और उनके आर्थिक हितों को नुकसान पहुँचा रहे है.
शिनचियांग में तेल और प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है और चीन उनका दोहन करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा. चीन की केन्द्र सरकार ने कुछ वर्षों पहले ‘पश्चिम का विकास” नामक योजना बनाई थी, जिसके तहत शिनचियांग का विकास किया गया. लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका सीधा लाभ वहाँ रह रहे हान लोगों को ही मिल रहा है. शिनचियांग के तेल, खेती और निर्माण व्यवसाय में हान लोगों का आधिपत्य है और वे लोग हान लोगों को ही नौकरी पर रखना पसंद करते हैं.
इससे उइगर लोगों में बेरोजगारी और हताशा बढ रही है और दोनों समुदाय एक दूसरे के खिलाफ सडकों पर उतर रहे है.
लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हान समुदाय के लोगों को भुगतना नहीं पड रहा. सरकार और उगीरों के बीच के संघर्ष से हान समुदाय के आम लोग भी पीस रहे हैं. न्यूयार्क टाइम्स की एक खबर के अनुसार शिनचियांग के अधिकतर आम हान लोग वापस अपने मूल प्रांत जाना चाहते हैं. वे उगीरों के लगातार हो रहे हमलों से परेशान हो चुके हैं.
शिनचियांग की राजधानी उरूंची में फल बेचने का काम करने वाले लु सिफेंग अब घर लौटना चाहते हैं. उनके एकमात्र बेटे लु हुआकुन की पिछले दिनों संघर्ष के दौरान मौत हो गई. उगीर उग्रवादी तत्वों ने उनके बेटे की हत्या कर दी थी. सिफेंग अब उरूंची में रहना नहीं चाहते. उनका कहना है कि सरकार ने सब्जबाग दिखाकर उनके जैसे कई लाख लोगों को शिनचियांग में बसा दिया, लेकिन यहाँ वे सुरक्षित नहीं है.