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आभासी मुद्रा का बढ रहा है चलन; विश्व की अर्थव्यवस्था को खतरा |
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इंटरनेट
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सोमवार , , 13 जुलाई |
यह मुद्रा वास्तव में होती नहीं है लेकिन आज इस मुद्रा का विनिमय कर वास्तविक खरीददारी की जा रही है. यह आभासी दुनिया है और इसकी वजह से देर सवेर विश्व की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पडना तय है. चीन दुनिया का पहला देश है जिसने इस तरह की मुद्रा के खिलाफ कदम उठाए हैं, लेकिन भारत जैसे देश में अभी इसके खतरे के बारे कम ही लोग जानते हैं.
चीन दुनिया का सबसे बडा ओनलाइन गेमिंग का बाज़ार है. आज ओनलाइन गेमिंग और वर्चुअल दुनिया में आभासी मुद्रा का जमकर उपयोग हो रहा है. सेकंड लाइफ और वार ऑफ विज़क्राफ्ट ऐसी आभासी दुनिया और खेल हैं जहाँ खिलाड़ी आभासी पैसों का उपयोग ना केवल आभासी वस्तुएँ बल्कि वास्तविक वस्तुएँ खरीदने मे भी कर रहा है.
चीन की ही बात करे तो इस देश के करोड़ो युवा आज ओनलाइन गेमिंग के नशे का शिकार हो चुके हैं और इन वेबसाइटों पर चलन में आने वाली आभासी मुद्रा का उपयोग कर रहे हैं.
चीन के इंटरनेट नेटवर्क इंफोर्मेशन सेंटर के अनुसार पिछले साल चीन में करीब 2 बिलियन आभासी मुद्रा का व्यापार हुआ था. लेकिन कुछ जानकारों के अनुसार यह काफी सिमित आँकडा है और वास्तविक आँकडा इससे कई गुना अधिक होगा.
चीन की बडी इंटरनेट कम्पनियाँ जैसे कि sohu.com , netease और tencent गेमिंग सुविधा भी देती है और आभासी मुद्रा का चलन वहाँ आम है.
अब तो ईबे और चीन की ताओबाओ जैसी ओनलाइन शोपिंग साइटें भी आभासी मुद्रा और आभासी सामानों का क्रय-विक्रय करती है.
अब चीन के वाणिज्य और सांस्कृतिक मंत्रालय ने आभासी मुद्रा के बदले वास्तविक चीज वस्तुओं की खरीद फरोक्त पर पाबंदी लगा दी है.
इंडियाना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एडवर्ड कास्त्रोनोवा – जो कि आभासी मुद्रा के खतरे के बारें में लिखते रहते हैं – का कहना है कि कम से कम एक सरकार तो ऐसी है जो इस खतरे के प्रति सचेत हुई है. आभासी मुद्रा एक दिन दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा साबित होगी.
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