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समलैंगिक आकर्षण के मामले में महिलाएँ पुरूषों से आगे |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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सोमवार , , 20 जुलाई |
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प्रसिद्ध मेडौना - ब्रिटनी स्पीयर्स चुम्बन
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ब्रिटनी स्पीयर्स और मैडोना, स्कार्लेट जॉनसन और पिनालोप क्रुज़, लिज़ा रे और शीतल शेठ. इन सभी सेलिब्रिटियों ने फिल्मों में अथवा आम जनता के बीच एक दूसरे को चुम्बन दिया था. ये सभी महिलाएँ हैं और ये "समलैंगिक" नहीं है. लेकिन पुरूष सेलिब्रिटियों द्वारा ऐसा ही कुछ किए जाने के उदाहरण नहीं हैं या फिर ना के बराबर हैं.
2006 में कराए गए एक सर्वे से पता चला था कि "सामान्य" महिलाओं में अन्य किसी महिला के प्रति आकर्षित होने की सम्भावना पुरूषों की अपेक्षा 27% तक अधिक होती है.
लेकिन ऐसा क्यों है?
इसका कोई सटीक जवाब नहीं है. कुछ मनौविज्ञानी इसे शारीरिक सरंचना से जोड कर देखते हैं तो कुछ इसके पीछे सांस्कृतिक प्रभाव देखते हैं.
उटाह विश्वविद्यालय की मनौवैज्ञानिक लिज़ा डायमंड के अनुसार यदि कोई महिला किसी अन्य महिला के तरह आकर्षित हो तो भी जरूरी नहीं कि वह समलैंगिक ही हो. महिलाएँ एक दूसरे के साथ सांस्कृतिक रूप से अधिक जुडी हुई होती हैं. वे एक दूसरे के साथ प्रयोग कर सकती है, नीजि बातें करती हैं तथा खुलापन महसूस करती हैं.
पुरूष एक दूसरे के साथ इतना खुल नहीं पाते और इसके पीछे उनकी बायोलोजिक सरंचना कार्य करती है.
लेकिन फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रॉय बोमिस्टर का कुछ और ही मानना है. उनका कहना है कि 2007 में कराए गए इसी प्रकार के सर्वे में भी 2006 के नतीजे ही देखने को मिले. ये सर्वे अलग अलग देशों जैसे कि ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, न्यूज़ीलैंड, मलेशिया आदि मे कराए गए थे. इन देशों में सांस्कृतिक विविधता देखने को मिलती है. इसलिए इन नतीजों को सांस्कृतिक कार्यकलापों के साथ जोड कर नहीं देखा जा सकता.
प्रोफेसर बोमिस्टर का मानना है कि महिलाओं की बायोलोजिक सरंचना उन्हें पुरूषों की अपेक्षा अधिका "बायोसेक्सुअल" बनाती है. वे एक दूसरे के साथ अधिक खुलापन महसूस कर सकती है. जबकि पुरूष ऐसा नहीं कर पाते.
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