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5 अनजानी बातें, जो प्रथम चन्द्रयात्रा से जुड़ी हुई है |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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गुरुवार , , 23 जुलाई |
प्रथम चन्द्रयात्रा को 40 साल बीत चुके हैं. आज से 40 वर्ष पहले अमेरिका ने "मैं पहले" की निति को अपनाते हुए तीन सद्स्य दल को चन्द्रमा की धरती पर भेजा था. अपोलो 11 नामक यान में सवार वे यात्री जानते थे कि हो सकता है वे फिर से वापस ना आएँ. इस घटना की यूँ तो हर बात अब लिखित - अलिखित रूप से मौजूद है. लेकिन फिर भी कुछ ऐसी बातें है जो सब नहीं जानते. नेशनल जियोग्राफिक न्यूज़ ने ऐसी ही 5 बातें प्रस्तुत की है -
- चन्द्रयात्रा पर जाने से पहले एक अंतरिक्षयात्री एडविन एल्ड्रिन ने गुप्त पूजा "कम्यूनियन" की थी. उन्होने अच्छे मुहूर्त के लिए एक वेफर और थोड़ी सी शराब भी अपनी किट में ली थी. एडविन ने अपनी पूजा को गुप्त रखा क्योंकि मेडेलिन मुर्रे नामक वकील ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा पूजा अर्चना करने के विरोध में एक केस दर्ज किया था.
- चन्द्रमा की धरती को छोड़ने से पहले चन्द्रयात्रियों ने कुछ निशानियाँ छोड़ी थी. इसमें अमेरिकी ध्वज के अलावा अपोलो 1 यान के अवशेष, उनके बैगपैक, उनके यान के कुछ मोड्यूल, यूरी गागरिन और व्लादिमीर कोमारोव के सम्मान में जारी कुछ प्रतीक शामिल हैं. नील आर्मस्ट्रोंग और एडविन एल्ड्रीन ने कुछ भावुक टिप्पणियाँ भी चन्द्रमा की धरती पर लिखी थी. और हाँ, बताया जाता है कि एडविन एल्ड्रीन पहले चन्द्रयात्री थे जिन्होनें चन्द्रमा की धरती पर पेशाब किया था.
- यदि चन्द्रमा की धरती पर कदम रखने गए यात्री वापस नहीं लौट पाते तो? अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपना बयान तैयार कर रखा था. वे कहते - उन बहादूर पुरूषों, नील आर्मस्ट्रोंग और एडविन एल्ड्रीन, को पता था कि उनके वापस लौटने की उम्मीद नहीं है, लेकिन वे जानते थे कि उनके बलिदान से मानवता के लिए उम्मीद बंधती है.
- वापस लौटते समय एक अंतरिक्षयात्री एक सर्किट ब्रेकर से टकरा गया था और वह हिल गया था. यह सर्किट ब्रेकर यान को वापस चलाने के लिए काम में आने वाला था. उस समय एडविन ने अपने फ्लेट टिप पेन की सहायता से उस सर्किट को दबाकर उसे सही जगह पर फिर से व्यवस्थित किया था. नहीं तो...
- दोनों अंतरिक्षयात्रियों नील आर्मस्ट्रोंग और एडविन एल्ड्रीन ने सम्मानपूर्वक अमेरिकी ध्वज चन्द्रमा की धरती पर लगाया था. परंतु जब वे वापस लौट रहे थे तो उनके यान के द्वारा छोड़ॆ गए धुँए और धूल के गुब्बार ने ध्वज को ढक दिया था.
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