|
7 जानी-अनजानी बातें स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी अरिहंत के बारे में |
|
शानदार 7
|
|
सोमवार , , 27 जुलाई |
आइएनएस अरिहंत भारत के अत्यंत गुप्त प्रोजेक्टों में से एक है. इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना कोई 40 वर्ष पहले देखी गई थी. 70 के दशक में तत्कालिन प्रधानमंती इंदिरा गांधी ने स्वदेशी तकनीक से बनी परमाणु पनडुब्बी बनाने का विचार सामने रखा था. उस समय चीन भी इसी प्रकार की परियोजना पर काम कर रहा था और अमेरिका के पास तो ऐसा पनडुब्बी थी भी.
- आइएनएस अरिहंत श्रेणी की अभी दो और सबमरीन बननी बाकी है. इनमें से एक का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है. भारत का लक्ष्य 2011 तक अरिहंत श्रेणी की तीनों पनडुब्बियों को सेवा में लेने का है.
- भारत 2020 तक 10 परमाणु पनडुब्बियाँ बनाना चाहता है. इनमें से 3 अरिहंत श्रेणी की होगी. इसके अलावा भारत अरिहंत से बड़ी सबमरीन बनाएगा जो बैलेस्टिक मिसाइल छोड़ सकेगी. जहाँ अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी का खर्च करीब 3000 हजार करोड़ है. इस पनडुब्बी [SSBN] का अनुमानित खर्च प्रति पनडुब्बी 10000 करोड़ होगा. इसके अलावा भारत परमाणु ऊर्जा से चलने वाली फास्टट्रैक सबमरीन भी बनाएगा जो SSBN श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए मार्ग खोजने का कार्य करेगी.
- अरिहंत प्रोजेक्ट पर निजी कम्पनियों ने अपना सक्रीय योगदान दिया है. इस पनडुब्बी का पैंदा और आवरण एल एंड टी ने अपने हजीरा प्लांट में बनाया है. इसके अलावा टाटा पावर ने इसका कमांड सिस्टम और वालचंदनगर इंडस्ट्रीज़ ने इसके स्टीम टर्बाइन सिस्टम का निर्माण किया है. एल एंड टी के लिए अरिहंत प्रोजेक्ट अब तक का सबसे बड़ा रक्षा ऑर्डर है.
- अरिहंत के लाइट वाटर परमाणु टर्बाइन को कलपक्कम में निर्मित किया गया और वहीं उसकी जाँच भी हुई. मैसूर के पास रत्नाहल्ली से इस प्लांट के लिए यूरेनियम प्राप्त किया गया. इसके अलावा आंध्रप्रदेश में विशाखापट्टनम के पास इस सबमरीन को रखने के लिए जगह बनाई गई.
- जब अरिहंत श्रेणी की तीनों पनडुब्बियाँ बन जाएंगी तो तीनों ही देश की पूर्वी सीमा पर [सम्भवत: विशाखापट्टनम के पास] तैनात की जाएगी. इनमें से दो किसी भी समय पानी में उतर कर हमला करने के लिए तैयार रहेगी और एक पनडुब्बी अतिरिक्त के तौर पर अपने बेस पर ही रहेगी.
- भारत ने यह प्रोजेक्ट हालाँकि काफी पहले शुरू कर दिया था लेकिन बीच के वर्षों में यह परियोजना खटाई में पड़ गई थी. इसके बाद 80 के दशक के मध्य में भारत ने रूस से चार्ली श्रेणी की परमाणु पनडुब्बी 3 साल के लिए भाड़े पर ली. इससे भारतीय वैज्ञानिकों को इस पनडुब्बी की जाँच करने का मौका मिल गया और इससे अरिहंत परियोजना के लिए आवश्यक डिजाइन और तकनीक प्राप्त की गई.
- अरिहंत को मारक क्षमता देगी के15 नामक मिसाइल. इस मिसाइल का एक परीक्षण हो भी चुका है. के15 इस मिसाइल का कोडनाम है. सुत्रों के अनुसार इस मिसाइल का असली नाम सागरिका होगा. इसके बाद के10 श्रेणी की मिसाइलें भी लगाई जाएगी जो कि वास्तव में अग्नी 3 होगी जो 3500 किलोमीटर तक मार कर सकेगी.
|
|