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एक और अल-नीनो! भारत पर अकाल का खतरा
पर्यावरण
सोमवार , , 10 अगस्त
तरकश ब्यूरो



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अमेरिका के मौसम विज्ञानियों को आशंका है कि 1997-98 के बाद अब एक बार फिर अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है. इससे आगामी 2010 अब तक का सबसे गर्म वर्ष साबित हो सकता है.
 
इससे भी गम्भीर बात यह है कि इस अल नीनो प्रभाव से अफ्रीका, भारत और ऑस्ट्रेलिया में अकाल जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.

अल नीनो क्या है? अल नीनो पूर्वी प्रशांत महासागर के अमुमन ठंडे पानी के कभी कभार गर्म हो जाने की स्थिति है. इससे हवाओं के रूख और बादलों की सरंचना पर प्रभाव पड़ता है.

इसका असर अल नीनो के असर से दक्षिण अमेरिका में भारी बारीश होगी, ब्रिटेन में ठंड बढ जाएगी और भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भयंकर गर्मी पड़ेगी और वर्षा कम होगी.

पूर्वी प्रशांत महासागर के पानी का तामपान .5 डिग्री तक बढता है तो अल नीनो का असर शुरू हो जाता है. मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस बार यह तापमान 0.5 से लेकर 1.5 डिग्री तक बढा है.

अल नीनो का यह असर अगले वर्ष सर्दियों तक रहने की सम्भावना है और इसका घातक असर देश के मौसम पर पड़ने जा रहा है.

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