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7 असफलताएँ भारत की जिन पर हमें दुख है
शानदार 7
शनिवार , , 15 अगस्त

स्वतंत्रता के बासठ साल हो जाने के बाद भी भारत कई क्षेत्रों में नितांत असफल रहा है. यह हमारे लिए चिंता की बात तो है ही, साथ ही सबक ले तो भविष्य का उज्जवल मार्ग भी साफ देख सकते है.

दंगे
1aspirin.jpg धर्म, प्रांत व भाषा के नाम पर भारत भीषण दंगे भोगता रहा है. जन-धन हानी के साथ साथ देश की प्रतिष्ठा भी खंडित होती रही है.

भ्रष्टाचार
foot.jpg महान संस्कृति का दम्भ भरने वाला भारत भ्रष्टाचारी देशों में शामिल होता है. हर चौथे सांसद पर आपराधिक मामले चल रहे है. हर दूसरा भारतीय कभी न कभी घूस जरूर देता है.

गरीबी
human-glow.jpg 120 करोड़ के देश में 27% जनता अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जी रही है. अगर अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा से तुलना करें तो 42% भारतीय गरीबीरेखा के नीचे जी रहे हैं.

 न मानने में आए ऐसी बात है कि भारत में 5 करोड़ बाल मजदूर हैं, जो किसी न किसी रूप में मजदूरी कर रहे हैं.

जनसंख्या
अनियंत्रित जनसंख्या देश के संसाधनों पर भारी दबाव बना रही है. प्रकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन पर्यावरण के लिए खतरा बनता जा रहा है. साठ साल में भारत की जनसंख्या चार गुना बढ़ गई है.

लिंग अनुपात में असंतुलन
napping.jpg सामाजिक मान्यताओं के चलते व नवीन संसाधनों की उपलब्धता से कन्याओं को गर्भ में ही मार देने का चलन इस हद तक बढ़ा की लिंग अनुपात ही गड़बड़ा गया है. आज देश के कई क्षेत्रों में 1000 पुरूष के मुकाबले मात्र 800 महिलाएं हैं.



सीमाएं सिकुड़ना
proposal.jpg कोई भी राष्ट्र अपनी सीमाओं में सुरक्षित रहता है और इस सीमाओं की रक्षा भी करता है. आज़ादी के बाद भारत की सीमाएं सिकुड़ी है. हमने अपनी जमीन पाकिस्तान व चीन के हाथों गँवाई है. 

अंग्रेजी राज
proposal.jpg स्वतंत्रता के साथ अंग्रेजी राज खत्म हुआ था, मगर एक विदेशी भाषा ने कहीं अधिक जड़े जमा ली है. भारत अंग्रेजी के स्थान पर अपनी भाषा को स्थापित करने में नाकाम रहा.  


अपनी राय टिप्पणी के माध्यम से दीजिए.
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http://jaihindi.blogspot.com
द्वारा प्रेषित बालसुब्रमण्यम , अगस्त 15, 2009
बहुत अच्छी समीक्षा है। मैं जनसंख्या को हटाकर शिक्षा को इस सूची में शामिल करूंगा, विशेषकर मातृ भाषा में प्राथमिक शिक्षा। जनसंख्या तभी समस्या है जब जनता अशिक्षित, कुपोषित और बेकार हो। यदि सभी लोगों को शिक्षित किया जा सके, सभी के भोजन की व्यवस्था की जा सके, और सभी को उपयुक्त नौकरी दी जा सके, तो यही जनसंख्या हमें अग्रणी देश में बदलकर रख देगी। आज यूरोप, जापान, अमरीका और यहां तक कि चीन में भी जनता बुढ़ा रही है। भारत ही ऐसा देश है जिसमें 15 वर्ष से 60 वर्ष के बीच की उम्र वाले लोगों की अधिकता है। इसी को डेमोग्राफिक डिविडेंड कहा गया है। यानी भारत की आबादी का अधिकांश कमा सकने की स्थिति में है, जब कि अन्य देशों में हर कमानेवाले के पीछे 3-4 पेंशनयाफ्ता वृद्ध जन हैं।

इसलिए आबादी कोई समस्या नहीं है, यदि हम अपनी आबादी की ठीक तरह से देखभाल करें।
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Responsibilities
द्वारा प्रेषित Naveen , अक्टूबर 08, 2009
we are/ indians are responseble for this Situations .
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