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छोटे बच्चे समझदारी में वयस्कों को भी मात दे सकते हैं |
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रोचक तथ्य और जानकारी
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मंगलवार , , 18 अगस्त |
छोटे बच्चों को हम नासमझ, भोले और विचारशक्ति से विहीन समझते हैं, परंतु ऐसा है नहीं. सच तो यह है कि बच्चे हमारी सोच से कहीं अधिक समझदार होते हैं. और कई मामलों में तो वे वयस्कों को भी पीछे छोड़ सकते हैं.
कुछ नई शोधों से पता चला है कि बच्चे जिज्ञासु होते हैं, वे नई चीजें सीखना चाहते हैं, खोजते हैं, समझते हैं और गुणात्मक अध्ययन कर अच्चे और बुरे की पहचान भी कर लेते हैं. यानी वह सबकुछ जो हमें असम्भव लगता है.
ब्रिटिश कोलम्बिया विश्वविद्यालय की फी ज़ु और वास्ती गार्सिया ने एक प्रयोग के द्वारा सिद्ध किया कि छोटे शिशुओं में भी सीखने की वृति काफी विकसित होती है. दोनों संशोधकों ने आठ महिने के शिशुओं पर एक प्रयोग किया. उन्होनें इन शिशुओं को एक डिब्बे में रखी पिंगपोंग गेंदे दिखाई. इनमें से सभी गेंदें सफेद थी और चार गेंदें लाल रंग की थी. कुछ देर बाद उन्होनें डिब्बा बदल दिया और इस बार लाल गेंदें अधिक और सफेद गेंदें चार कर दी. सभी शिशु चौंक गए और डिब्बे को देर तक देखते रहे. इससे साबित होता है कि उनमें रंगों की और गुणात्मक अध्ययन की काबिलियत होती है. वे समझते हैं कि कुछ अलग हुआ है.
इसी तरह से कुछ अन्य प्रयोगों द्वारा यह साबित किया गया कि बच्चों में कुछ नया सीखने की ललक होती है और वे खेलते खेलते उन चीजों को सीख लेते हैं. एक प्रयोग में कुछ बच्चों को एक लीवर वाला खिलौना दिया गया जिसको दबाने से गुड़िया बाहर आती है. एक समूह के बच्चों को यह खिलौना आम खिलौने जैसा ही लगा और उन्होने उसे छोड़ दिया. लेकिन दूसरे समूह के बच्चों को लीवर की तकनीक पता चल गई और वे उस खिलौने के साथ प्रयोग करने लग गए.
न्यूयार्क टाइम्स की खबर के अनुसार यह सही है कि बच्चों में सीखने की प्रवृति काफी विकसित होती है परंतु अभिभावक इसका गलत मतलब निकाल लेते हैं. वे यह सोचने लग जाते हैं कि उन्हें ऐसे कार्यक्रमों और उत्पादों की जरूरत पड़ेगी जिससे उनके बच्चे स्मार्ट बन जाएँ. परन्तु सच्चाई तो यह है कि सुलभ और उपलब्ध चीजों से भी बच्चों को शिक्षित किया जा सकता है.
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