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दुनिया भर के सिँहों पर विलुप्त होने का खतरा |
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पर्यावरण
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बुधवार , , 19 अगस्त |
दुनिया में सिँह [शेर] मात्र अफ्रीका और भारत में ही पाए जाते हैं, और इन पर विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगा है.
अफ्रीका के केन्या के मसाईमारा जंगल में करीब 2000 शेर बचे हैं और केन्या वाइल्डलाइफ सर्विस की मानें तो अगले 20 साल के अंदर ये सभी शेर विलुप्त हो सकते हैं. इसकी वजह है शिकार की कमी, लोगों द्वारा ज़हर देना, जंगलों में मानव की घुसपैठ, वातावरण में बदलाव और बिमारियाँ.
2002 में केन्या में शेरों की संख्या 2749 थी जो अब घटकर 2000 के आसपास रह गई है, जो कि चिंता का विषय है. केन्या के लिए सिहं सम्मान का विषय रहे हैं. वे वहाँ के जनजीवन का हिस्सा हैं और पर्यटन का मुख्य आकर्षण भी जिससे केन्या को अच्छा राजस्व प्राप्त होता है. इसलिए शेरों की संख्या में कमी केन्या के लिए काफी चिंताजनक है.
दूसरी तरफ एशियाई सिहं मात्र भारत में गुजरात के गीरनार अभ्यारण में पाए जाते हैं. यहाँ इनकी संख्या करीब 250 के आसपास की है. इनमें से कुछ सिँहो को मध्यप्रदेश के कुना जंगल में स्थलांतरित करने की मांग अरसे से उठ रही है. इसकी वजह यह बताई जाती है कि सिहँ एक ही स्थान पर रहें तो महामारी तथा अन्य कारणों की वजह से उनके खत्म होने की आशंका बनी रहती है. इसलिए सिंहो को मध्यप्रदेश के कुना जंगल में भी स्थलांतरित करना चाहिए जो कि गीर जंगल से अधिक घना भी है.
लेकिन सिहँ चुँकि गुजरात के जनमानस से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं, इसलिए गुजरात सरकार सिंहो के कुछ जोड़ों को मध्यप्रदेश स्थलांतरित करने के पक्ष में नहीं है.
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